Chhath Nahay Khay

Date - 12 November 2018

Sunday

Chhath Kharna

Date - 12 October 2018

Monday

Chhath Sandhya Argh

Date - 13 November 2018

Chhath Evening Argh Time - 5:28 PM
Tuesday, November 13, 2018 (IST)

Sunset in Swami Dayanand Enclave, Burari, Delhi

Chhath Morning Argh

Date - 14 November 2018

Chhath Morning Argh Time - 6:43 AM
Wednesday,November 14, 2018 (IST)
Sunrise in Swami Dayanand Enclave, Burari, Delhi

सावन में शिवजी की पूजा – Saawan Shivji pooja

 

शिवजी की पूजा सावन महीने में विशेष रूप से की जाती है। देवी सती ने पिता दक्ष के घर में शरीर त्यागने के समय हर जन्म में महादेव को

पति बनाने का प्रण लिया था। अगले जन्म में देवी ने पार्वती के रूप में जन्म लिया और सावन के महीने में निराहार व्रत करके महादेव को प्रसन्न

करके उनसे  विवाह किया था। इसी वजह से सावन का महीना शिवजी को प्रिय है। कुंवारी कन्याएं अच्छे वर के लिए और विवाहित महिलाएँ

सुहाग की सलामती के लिए सावन के सोमवार का व्रत करती है। स्त्री पुरुष सभी को सावन के महीने में शिव की पूजा करने से लाभ होता है।

 शिव जी का व्रत तीन प्रकार से  किया जाता है। प्रति सोमवार व्रत , सौम्य प्रदोष व्रत और सोलह सोमवार व्रत। तीनो की विधि एक समान

ही होती है।

 

सोलह सोमवार के व्रत की कहानी  :

एक बार शिवजी और पार्वती जी मृत्युलोक में भ्रमण करने पधारे। दोनों विदर्भ देश में अमरावती नामक सुन्दर नगर में पहुंचे। यह नगरी सभी

प्रकार के सुखों से भरपूर थी। वहां बहुत सुन्दर शिवजी का मंदिर भी था। भगवान शंकर पार्वती के साथ उस मंदिर में निवास करने लगे।

एक दिन माता पार्वती भोलेनाथ के साथ चौसर खेलने की इच्छा प्रकट की। शिवजी ने उनकी बात मन ली और दोनों चौसर खेलने लगे। तभी

मंदिर का पुजारी पूजा करने आया। माता पार्वती ने उससे पूछा – पुजारी जी हममे से कौन जीतेगा ? पुजारी बोला – महादेव ही जीतेंगे। थोड़ी देर

बाद खेल समाप्त हुआ तो विजय पार्वती की हुई।

 पार्वती को पुजारी पर क्रोध आया और उसे कोढ़ी होने का श्राप दे दिया। कोढ़ से ग्रस्त  पुजारी बहुत दुखी रहने  रहने लगा। एक दिन देवलोक

की अप्सरा शिव जी की पूजा के लिए उस मंदिर में आई। पुजारी को कोढ़ की अवस्था में देखकर दयाभाव से पूछताछ करने लगी। पुजारी ने

सारी बात बता दी। अप्सराएँ बोली – तुम सभी व्रतों में श्रेष्ठ सोलह सोमवार के व्रत करो। इससे शिव जी प्रसन्न होंगे और वे तुम्हारे कष्ट अवश्य दूर

करेंगे। पुजारी ने इस व्रत की विधि पूछी।

अप्सरा ने बताया – सोमवार के दिन व्रत रखो। स्वच्छ वस्त्र धारण करो। संध्या और उपासना के बाद  आधा किलो गेहूं का आटा लेकर इसके

तीन अंग बनाओ। घी , गुड़ , दीप , नैवेद्य , पुंगीफल , बेलपत्र , जनेऊ जोड़ा , चन्दन ,अक्षत और पुष्प आदि से प्रदोषकाल में भगवान शंकर

का पूजन करो। तीन अंग में से एक शिवजी को अर्पण करो। बाकि दो को शिव जी के प्रसाद के रूप में उपस्थित जन को बाँट दो। खुद भी

प्रसाद लो। इस तरह सोलह सोमवार व्रत करो। सत्रहवें सोमवार को पाव भर की पवित्र आटे की बाटी बनाओ। उसमे घी और गुड़ मिलाकर

चूरमा बनाओ। शिव जी को भोग लगाकर उपस्थित भक्तों में बाँट दो। इसके बाद कुटुंब सहित प्रसाद लो। इससे सभी मनोरथ पूरे हो जाते हैं।

ऐसा बताकर अप्सराएँ चली गई। पुजारी ने यथाविधि सोलह सोमवार के व्रत किये। भगवान शिव की कृपा से कोढ़ मुक्त हो गया और आनंद से

रहने लगा।

 कुछ दिन बाद शिवजी और पार्वती जी वापस उसी मंदिर मेंआये । ब्राह्मण को निरोगी देखकर कारण पूछने लगी। पुजारी ने सोलह सोमवार व्रत

की कथा  सुनाई। पार्वती जी खुद भी सोलह सोमवार के व्रत करने के लिए तैयार हो गई। ये व्रत करने से उनसे रूठे हुए पुत्र कार्तिकेय माता के

आज्ञाकारी हो गए। कार्तिकेय ने माता से पूछा कि आपने क्या किया जिससे मेरा हृदय परिवर्तन हो गया।

पार्वती ने सोलह सोमवार की कथा उन्हें सुना दी। कार्तिकेय ने अपने खास मित्र जो कही खो गया था उसके मिलने की कामना से सोलह

सोमवार के व्रत किये तो उन्हें जल्द ही वह मित्र मिल गया। मित्र ने इस आकस्मिक मिलन का कारण पूछा तो कार्तिकेय ने उसे सोलह सोमवार

के व्रत करना बताया। मित्र ने व्रत की विधि पूछी और स्वयं के विवाह की मनोकामना से सोलह सोमवार के व्रत किये।

कार्तिकेय का मित्र एक स्वयंवर की सभा में गया तो वहां की राजकुमारी ने आकर्षित होकर उसके गले में वर माला डाल दी और उसे अपना

पति स्वीकार कर लिया। राजा ने उन्हें बहुत सा धन और सम्मान देकर भेजा। दोनों सुख से रहने लगे। जब सोलह सोमवार के व्रत का उसकी

पत्नी को पता लगा तो उसने पुत्र प्राप्ति की कामना से सोलह सोमवार के व्रत किये। उसके एक अति सुन्दर ,सुशील और बुद्धिमान पुत्र प्राप्त

हुआ। जब वह बड़ा हुआ तो उसने अपनी माँ से सोलह सोमवार के व्रत की गाथा सुनी तो उसने राज्याधिकार प्राप्त करने के लिए सोलह

सोमवार के व्रत शुरू कर दिए।

एक राजा को अपनी कन्या के लिए योग्य पुरुष की तलाश थी। राजा ने अपनी कन्या का विवाह उस सर्व गुण संपन्न पुरुष से कर दिया। राजा के

कोई पुत्र नहीं था। अपने दामाद की योग्यता देखकर उसे राजा बना दिया। राजा बनने के बाद भी वह सोलह सोमवार के व्रत करता रहा। सत्रवां

सोमवार आने पर उसने अपनी पत्नी से शिवजी की पूजा के लिए मंदिर चलने को कहा। उसने दासियों से कहकर पूजा की सामग्री तो भिजवा दी

लेकिन खुद नहीं गयी।

राजा ने शिवजी की पूजा समाप्त की तो आकाशवाणी हुई – हे राजा , अपनी रानी को राजमहल से निकाल दे नहीं तो सर्वनाश हो जायेगा।

राजदरबार में आकर सभासदों से विचार विमर्श किया और सर्वनाश के भय से रानी को राजमहल से निकाल दिया गया। अपने दुर्भाग्य को

कोसती हुई नगर से बाहर चली गई। दुखी मन से चलते हुए एक गांव में पहुंची। वहां एक बुढ़िया थी जो सूत बेचती थी। बुढ़िया ने दया करके

रानी को अपने साथ सूत बेचने के लिए रख लिया। जब से रानी को साथ रखा बुढ़िया का सूत बिकना बंद हो गया। बुढ़िया ने रानी से वहां से

जाने को कह दिया। रानी एक तेली के यहाँ काम मांगने गई उसी समय तेली के मटके चटक गए और उसका तेल बह गया। तेली ने भी उसे

वहां से भगा दिया। दुखी होकर रानी एक नदी के पास गई तो नदी का सारा पानी सूख गया। एक पेड़ के नीचे बैठी तो पेड़ के सारे पत्ते सूख कर

गिर गये।

आस पास के लोगों ने यह देखा तो उसे पकड़ कर मंदिर के पुजारी गुसांई जी के पास ले गए। गुसाईं जी देखते ही जान गए की यह कोई विधि

की मारी कुलीन स्त्री है। गुसाईं जी ने रानी से कहा कि वह उनके आश्रम में उनकी पुत्री की तरह रहे। रानी आश्रम में रहने लगी। रानी भोजन

बनाती थी तो उसमे कीड़े पड़ जाते थे। पानी भरकर लाती तो वह गन्दा हो जाता था। गुसाईं जी ने दुखी होकर उससे पूछा की तुम्हारी यह दशा

कैसे हुई ? यह किस देवता का कोप है ? जब रानी ने शिव जी की पूजा में नहीं जाने वाली बात बताई तो गुसाईं जी बोले – पुत्री तुम सोलह

सोमवार के व्रत करो। इससे तुम अपने कष्टों से मुक्ति पा लोगी।

गुसाईं जी की बात मानकर रानी ने सोलह सोमवार के व्रत किये सत्रहवें सोमवार के दिन विधि विधान से शिवजी की पूजा की। पूजन के प्रभाव

से राजा को रानी की याद सताने लगी और रानी को ढूंढने के लिए उसने चारों दिशाओं में दूत भेज दिए। रानी की तलाश में घूमते हुए दूत

गुसाई के आश्रम में पहुँच गए। राजा को खबर लगी तो राजा रानी को ले जाने आश्रम पहुँच गया। गुसाईं जी से बोला – यह मेरी पत्नी है। शिव जी

के कोप की वजह से मैने इसे महल से निकाल दिया था। अब शिवजी का प्रकोप शांत हो चुका है। इसे मेरे साथ जाने की आज्ञा दीजिये। गुसाई

जी  ने रानी को राजा के साथ जाने की आज्ञा दे दी। रानी बहुत प्रसन्न हुई।

राजा और रानी के आने की ख़ुशी में नगर वासियों ने खूब सजावट की , मंगल गान गाये , पंडितों ने मन्त्र आदि गाकर स्वागत किया। इस तरह

धूमधाम से रानी का महल में प्रवेश हुआ। राजा ने ब्राह्मणो को दान आदि दिए , याचकों को धन धान्य दिया। जगह जगह भूखे लोगों को खाना

खिलाने के लिए भंडारे खुलवाए। राजा रानी सोलह सोमवार के व्रत करते हुए शिव जी का विधि विधान से पूजन करते हुए सुखपूर्वक लंबे समय

तक जीवन बिताने के बाद शिवपुरी पधारे।

जो मनुष्य मन , वचन और कर्म से भक्तिपूर्वक सोलह सोमवार का व्रत और पूजन विधिवत करता है वह सभी सुखों को प्राप्त करके शिवपुरी को

गमन करता है। यह व्रत सभी मनोरथ पूर्ण करता है।

 

                                जय शिव शंकर !!!

 

 

सोमवार व्रत उपवास अवश्य करने चाहिए।

 

भारत में 12 ज्योतिर्लिंग है ,जो की शिव जी के विशेष मंदिर है। इनके दर्शन का बहुत महत्त्व है। ज्योतिर्लिंग इस प्रकार है :

 

सोमनाथ  –  गुजरात  ,  मल्लिकार्जुन –  आन्ध्र प्रदेश  ,  महाकालेश्वर – उज्जैन , मध्य प्रदेश  ,

ओंकारेश्वर – इंदौर , मध्य प्रदेश ,  केदारनाथ – उत्तराखंड   , भीमाशंकर – पूना , महाराष्ट्र  ,

 

विश्वनाथ – काशी ,उत्तर प्रदेश ,  त्रयंबकेश्वर – नासिक , महाराष्ट्र  , बैद्यनाथ  –  बिहार ,

नागेश्वर – द्वारिका , गुजरात ,  रामेश्वरम – रामनाथ पुरम , तमिलनाडु , घृष्णेश्वर – दौलताबाद , महाराष्ट्र

 

2017  में सावन के सोमवार वाले दिन – Sawan Somvar 2017 Date

 

इस वर्ष 5 सोमवार है। उत्तर भारत यानि राजस्थान , पंजाब , बिहार , उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश , हिमाचल प्रदेश  अदि राज्यों में इस साल यानि

2017  में सावन महीना सोमवार 10  जुलाई से शुरू हो रहा है। 10  जुलाई , 17  जुलाई , 24 जुलाई , 31 जुलाई तथा 7 अगस्त को सोमवार शिव

पूजा और व्रत के दिन आएंगे।

 

दक्षिण भारत में यानि तमिल नाडु , कर्नाटक , आंध्र प्रदेश , महाराष्ट्र , गुजरात आदि राज्यों में इस साल सावन महीना सोमवार 24 जुलाई से

शुरू होगा। 24 जुलाई , 31 जुलाई , 7 अगस्त , 14 अगस्त तथा 21 अगस्त को सोमवार शिव पूजा और व्रत के दिन आएंगे।

 

सावन के सोमवार को शिवजी की पूजा करने का तरीका

Saawan ke somvar shiv puja ka tareeka

 

सावन के सोमवार के व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए। दैनिक कार्यों से निवृत होकर नहा धोकर शुद्ध सफ़ेद रंग के कपडे

पहनने चाहिए। भगवान शिव की पूजा यदि घर में करनी हो तो पूजा का स्थान साफ करके गंगाजल छिड़क कर शुद्ध कर लेना चाहिए।

 

इसके बाद शिव जी की मूर्ती या तस्वीर को स्थापित करके साफ आसन पर बैठ कर पूजा करनी चाहिए। घर में सिर्फ पारद या नर्मदेश्वर

शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए। बाहर मंदिर में पूजा करने जाना हो तो पूजा का सामान ढक कर ले जाना चाहिए। संभव हो तो मंदिर में भी

शुद्ध आसन पर बैठ कर पूजा करनी चाहिए। पूजा करते समय आपका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए।

 

शिव पूजा की सामग्री – Shiv Pooja Samagri

 

  • जल कलश
  • गंगा जल
  • कच्चा दूध
  • दही
  • घी
  • शहद
  • चीनी
  • केसर
  • वस्त्र
  • चन्दन रोली
  • मौली
  • चावल  ( अक्षत )
  • फूलमाला , फूल
  • जनेऊ
  • इत्र
  • बील पत्र
  • आंक , धतूरा
  • भांग
  • कमल गट्टा
  • पान
  • लौंग , इलायची , सुपारी
  • धूप , दीप , अगरबत्ती
  • माचिस
  • कपूर
  • फल
  • मेवा
  • मिठाई
  • नारियल
  • दक्षिणा के पैसे

 

शिव पूजा की विधि – Shiv Pooja Vidhi

 

—  पूजा के लिए सबसे पहले  पूजा के सामान  को यथास्थान रख दें ।

 

—  अब भगवान शिव का ध्यान करके ताम्बे के बर्तन से शिव लिंग को जल से  स्नान कराएँ  ।

 

—  गंगा जल से स्नान कराएं।

 

—  इसके बाद दूध , दही , घी , शहद और शक्कर से स्नान कराएँ । इनके मिश्रण से बनने वाले पंचामृत से भी स्नान करा सकते है।

 

—  इसके बाद सुगंध स्नान के लिए केसर के जल से स्नान कराएँ । जानिये असली केसर को पहचानने के तरीके।

 

—  चन्दन आदि लगाएँ ।

 

—  अब मौली , जनेऊ , वस्त्र आदि चढ़ाएँ।

 

—  अब इत्र और पुष्प माला , बील पत्र आदि चढ़ा दें। बील पत्र 5 ,11 , 21 , 51 आदि शुभ संख्या में लें। बीलपत्र चढाने से रोगों से मुक्ति मिलती

है।

 

—  आंकड़े और धतूरे के फूल चढ़ाएँ । शिव जी को सफ़ेद रंग अतिप्रिय है क्योकि ये शुद्ध , सौम्य और सात्विक होता है। आंकड़ा और धतूरा

चढ़ाने से पुत्र का सुख मिलता है।

 

—  वाहन सुख के लिए चमेली का फूल चढ़ाएँ , धन की प्राप्ति के लिए कमल का फूल, शंखपुष्पी या जूही का फूल चढ़ाएँ  , विवाह के लिए बेला

के फूल चढ़ाएँ , मन की शांति के लिए शेफालिका के फूल चढाने चाहिए। पारिवारिक कलह से मुक्ति के लिए पीला कनेर का फूल चढ़ाएं।

 

—  शिव जी की पूजा करते समय आपकी भावना  शुद्ध और सात्विक होनी चाहिए ( जैसे शिव खुद है ) ।

 

—  अब धूप , दीप आदि जलाएँ।

 

—  अब फल मिठाई आदि अर्पित कर भोग लगाएँ।

 

—  इसके बाद पान , नारियल और दक्षिणा चढ़ाएँ।

 

—  अब आरती करें।

 

जय  शिव ओमकारा , ओम  जय शिव ओमकारा    ।

  ब्रह्मा  ,   विष्णु  ,  सदाशिव   ,  अर्धांगी    धारा  । ।

ओम जय …

एकानन   चतुरानन     पंचानन    राजे    ।

  हंसासन  गरुडासन  वृष  वाहन   साजे  । ।

ओम जय …

दो भुज चार चतुर्भुज  दसभुज अति सोहे  ।

   त्रिगुण रूप निरखते , त्रिभुवन जन मोहे  । ।

ओम जय …

अक्ष   माला   वनमाला   मुंडमाला   धारी   ।

 

 त्रिपुरारी   कंसारी    कर    माला   धारी  । ।

ओम जय …

श्वेताम्बर     पीताम्बर      बाघम्बर   अंगे  ।

 सनकादिक  गरुणादिक  भूतादिक   संगे  । ।

ओम जय …

कर  के  मध्य  कमण्डलु  चक्र  त्रिशूलधारी  ।

सुखकारी   दुखकारी   जगपालन   कारी  । ।

 ओम जय …

ब्रह्मा  विष्णु  सदाशिव  जानत  अविवेका  ।

प्रणवाक्षर   में  शोभित   ये   तीनो   एका  । ।

 

ओम जय …

त्रिगुण स्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे ।

  कहत  शिवानन्द  स्वामी  सुख सम्पति  पावे  । ।

ओम जय शिव ओमकारा …..

 

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ॐ  त्रियम्बकं  यजामहे  सुगन्धिं  पुष्टिवर्धनं ।

उर्वारुकमिव बंधनात मृत्योर्मुक्षीय मामृतात । ।

 

—  आरती के बाद क्षमा मंत्र बोलें। क्षमा मन्त्र इस प्रकार है :

 

” आह्वानं ना जानामि, ना जानामि तवार्चनम, पूजाश्चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर: “

 

श्रद्धा पूर्वक इस प्रकार सावन के सोमवार को पूजा सम्पूर्ण करने से भगवान शिव प्रसन्न होकर मनोरथ पूर्ण करते है।

 

इस दिन महामृत्युंजय , शिवसहस्र नाम , रुद्राभिषेक ,शिवमहिमा स्रोत ,शिवतांडव स्रोत या शिवचालीसा आदि का पाठ करना बहुत लाभकारी

होता है।

 

शिवपूजा करते समय ध्यान रखें – Be Careful

 

—  शिवलिंग पर सिन्दूर , हल्दी , लाल रंग के फूल , केतकी और केवड़े के फूल आदि या स्त्री सौंदर्य से सम्बंधित सामान ना चढ़ाएँ। क्योंकि

शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक है। जलधारी पर ये चढ़ाये जा सकते है क्योकि जलधारी माता पार्वती और स्त्रीत्व का प्रतीक होती है।

 

—  शिव लिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती है। आधी परिक्रमा ही लगाएं।

 

सावन के सोमवार व्रत करने का तरीका

Savan ke somvar ko vrat karne ka tareeka

 

यह व्रत सुबह सूर्योदय से शुरू करके दिन के तीसरे पहर यानि सूर्यास्त  तक किया जाता है। सूर्यास्त के बाद भोजन कर सकते है। उसके पहले

अनाज व नमक नहीं लिया जाता है। जहाँ तक संभव हो सूर्यास्त तक पानी , फ्रूट जूस , दूध , छाछ आदि ही लेने चाहिए। नींबू पानी सेंधा नमक

व काली मिर्च डालकर पी सकते है।

 

व्रत के समय तला – भुना सामान बिलकुल नहीं लेना चाहिए। यदि कंट्रोल न हो तो पनीर ,उबला आलू , कुट्टू , सिंघाड़े या राजगिरि का आटा ,

साबूदाना , दही , सूखे मेवे , मूंगफली , नारियल पानी , शेक आदि में से अपनी पसंद से सिर्फ एक बार कुछ भी ले सकते है।

 

पानी खूब पिएँ। सिर्फ तरल पदार्थ लेने से शरीर के विषैले तत्व निकल जाते है और मन व आत्मा की शुद्धि हो जाती है।

Sawan Somvar 2017 Vrat Vidhi Katha Mantra Rituals

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