Chhath Nahay Khay

Date - 12 November 2018

Sunday

Chhath Kharna

Date - 12 October 2018

Monday

Chhath Sandhya Argh

Date - 13 November 2018

Chhath Evening Argh Time - 5:28 PM
Tuesday, November 13, 2018 (IST)

Sunset in Swami Dayanand Enclave, Burari, Delhi

Chhath Morning Argh

Date - 14 November 2018

Chhath Morning Argh Time - 6:43 AM
Wednesday,November 14, 2018 (IST)
Sunrise in Swami Dayanand Enclave, Burari, Delhi

Sharad Navratre 2018

 

शरद नवरात्रे

Pratipada (Navratri Day 1)     Wednesday     10 October 2018
Dwitiya (Navratri Day 2)     Thursday     11 October 2018
Tritiya (Navratri Day 3)     Friday     12 October 2018
Chaturthi (Navratri Day 4)     Saturday     13 October 2018
Panchami (Navratri Day 6)     Sunday     14 October 2018
Sasthi (Navratri Day 6)     Monday     15 October 2018
Saptami (Navratri Day 7)     Tuesday     16 October 2018
Ashtami (Navratri Day 8)     Wednesday     17 October 2018
Navami (Navratri Day 9)     Thursday     18 October 2018

२१ सितम्बर २०१७ - प्रथमं  -  शैलपुत्री
२२ सितम्बर २०१७ - द्वितीया -  ब्रह्मचारिणी
२३ सितम्बर २०१७ - तृतीया - चंद्रघंटा
२४ सितम्बर २०१७ - चतुर्थी - कूष्माण्डा
२५ सितम्बर २०१७ - पंचमी - स्कंदमाता
२६ सितम्बर २०१७ - षष्ठी  - कात्यायनी
२७ सितम्बर २०१७ - सप्तमी - कालरात्रि
२८ सितम्बर २०१७ - अस्टमी - महागौरी
२९ सितम्बर २०१७ - नवमीं - सिद्धिदात्री
३० सितम्बर २०१७ - दशमी - विजयदशमी (दुर्गा विसर्जन )
 
ब्रस्पतिवार २१ सितम्बर २०१७
माता शैलपुत्री

माँ दुर्गा के नौ रूप होते है उनमे से प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री का है | नवरात्री के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है | माता शैलपुत्री का नाम शैलपुत्री हिमालय  के घर जन्म लेने के कारण  पड़ा इन्हे सती के नाम से भी पुकारा जाता है |
 
शैलपुत्री का वाहन - वृषभ है |
इनका दूसरा नाम - वृषारूढ़ा है |
दाहिने हाथ में - त्रिशूल है |
बाहिने हाथ में - कमल है |
 
शैलपुत्री की कथा

एक समय की बात है जब दक्ष प्रजापति ने यज्ञ रखा तो उस यज्ञ में सारे देवी देवताओं को निमंत्रित किया गया , लेकिन भगवान शंकर और माता पार्वती को यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया गया। लेकिन सती जी यज्ञ में जाने के लिए तैयार हो गई । शंकरजी ने माता पार्वती को बहुत समझाया की वहाँ मत जाओ  हमे निमंत्रित नहीं किया है इसलिए  ऐसे में वहां जाना उचित नहीं है | सती जी के बार - बार आग्रह करने पर शंकरजी ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी। सती जब अपने घर पहुंचीं जहाँ यज्ञ हो रहा था तो उनकी  मां ने उन्हें स्नेह दिया।  और उनकी बहनों ने भी उन्हें स्नेह दिया सिर्फ माता सती के पिता दक्ष प्रजापति ने ही माता सती को स्नेह नही किया | दक्ष ने भगवान शंकर को लेकर बहुत ही कड़वे वचन बोले और माता सती को भी अपमानजनक शब्द कहे जो माता सती को सहन नहीं हुए | माता सती से अपने पति यानि की  भगवान शंकर का अपमान उनसे सहा नहीं गया और वो क्रोधित हो उठी क्रोध में उन्होंने अपने - आप को योगाग्नि द्वारा जलाकर भस्म कर लिया। इस  दुख से व्यथित होकर शंकर भगवान ने अपनी जटा से वीरभद्र को उत्पन्न किया और उसने यज्ञ का विध्वंस  कर दिया। यही सती अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मीं और शैलपुत्री कहलाईं। शैलपुत्री का विवाह भी भगवान शंकर से हुआ। शैलपुत्री शिवजी की अर्द्धांगिनी बनीं।
 
शैलपुत्री मन्त्र
वन्दे वांच्छितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌।
 वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥
 
शुक्रवार २२ सितम्बर २०१७
 माता ब्रह्मचारिणी

भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए इन्होंने घोर तपस्या की थी इसी लिए इनको माता ब्रह्मचारिणी के नाम से पुकारा जाता है |
माता ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ - में जप करने की माला है
माता ब्रह्मचारिणी के बाहिने हाथ - में कमण्डल है
माता ब्रह्मचरिणी का दूसरा नाम - अपर्णा है
 
माता ब्रह्मचारिणी की कथा

अपने पिछले जन्म में इन्होने शंकर जी को पाने के लिए नारद जी के कहने पर घोर तप किया था | एक हजार वर्ष तक इन्होने केवल फल - फूल खाकर अपना जीवन व्यतीत किया और सौ वर्ष तक जमीन पर रहकर पत्तो पर निर्वाह किया | काफी दिनों तक कठोर उपवास रखे ,तेज धूप और वर्षा में रहकर अत्यंत दुःख और पीड़ा सही | कहते है की माता ने तीन हजार सालो तक केवल बेल के सूखे पत्तो का सेवन किया और निरंतर भगवान शिव की आराधना करती रही | कुछ समय बाद तो इन्होने सूखे पत्ते खाना भी बंद कर दिया और निर्जलऔर बिना आहार के तप करने लगी|  पत्तो का सेवन छोड़ देने पर इनका नाम अपर्णा पड़ा | निराहार तप करने के कारण माता का शरीर क्षीण हो गया |
सभी देवी देवताओ ने , ऋषि मुनिओ ने ,सिद्धगणों ने माता ब्रह्मचारिणी की तपस्या की बहुत सराहना की और कहा  की ऐसा तप कोई और नहीं कर सकता ये सिर्फ आपसे ही संभव था | उन्होंने कहा की अब आप घर लौट जाइये आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी और आपको शिव शंभू पति के रूप में अवश्य मिलेंगे | आपके पिता आपको लेने आ रहे है | माता ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है | इस कथा का निष्कर्ष यही है की कितनी भी मुश्किलें क्यों न आ जाए जीवन में लेकिन मन को विचलित मत होने देना |
 
माता ब्रह्मचारिणी मंत्र
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
 
शनिवार २३ सितम्बर २०१७
माता चंद्रघंटा

नवरात्री के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा - अर्चना की जाती है |
माता चंद्रघंटा के ललाट में - घंटे जैसा आधा चंद्रमा सुशोभित है |
इनका शरीर का रंग  - सोने जैसा चमकीला है |
इनका वाहन - सिंह है |
इनकी भुजाएँ - दस है |
माता चंद्रघंटा के हाथो में तलवार और अनेक अस्त्र-शस्त्र है इसीलिए उनकी इस प्रकार की मुद्रा युद्ध  के लिए उद्धत रहने की है।माता चंद्रघंटा की आराधना करने से वीरता और निर्भयता के साथ ,सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है।माता चंद्रघंटा का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है |
 
माता चंद्रघंटा मंत्र
पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥
 
रविवार २४ सितम्बर २०१७
माता कूष्माण्डा

नवरात्रि में चतुर्थी के दिन माता कुष्मांडा की पूजा -अर्चना की जाती है | अपनी धीमी सी मुस्कान और हंसी के द्वारा अण्ड यानी ब्रह्मांड को उत्पन्न किया  जिस कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम से जाना जाने लगा।
माता कूष्माण्डा की - आठ भुजाएं है |
माता कूष्माण्डा के सात हाथो में - कमण्डल ,धनुष, बाण,कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं।
माता कूष्माण्डा के आठवे हाथ में - जप माला है |
माता कूष्माण्डा की प्रिय बलि - कुम्हड़े की है |
माता कूष्माण्डा का वाहन - सिंह है |
माता कूष्माण्डा का वास स्थल सूर्यमंडल के  है। सूर्यलोक में रहने की  क्षमता केवल इन्हीं में है।  इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है।
माता कूष्माण्डा आधियों-व्याधियों से मुक्त करती हैं और अपने भक्तो को सुख समृद्धि और उन्नति प्रदान करती हैं।  
 
माता कूष्माण्डा मंत्र
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु मे।
 
सोमवार २५ सितम्बर २०१७
स्कंदमाता

नवरात्रि में पंचमी के दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है |
स्कंदमाता की भुजाएं - चार है |
दाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में -  स्कंद यानी कार्तिकेय को गोद में बिठा रखा है |
दाईं तरफ के नीचे वाले हाथ में - कमल का फूल है |
बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में - वरदमुद्रा में है |
स्कंदमाता का वाहन - सिंह है |
 स्कंदमाता की उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं। भक्त को मोक्ष प्राप्त होता है | जो भक्त मन को एकाग्र रखकर और पवित्र रखकर स्कंदमाता की  आराधना करता है उसे  भवसागर पार करने में कठिनाई नहीं आती है।
 यह देवी विद्वानों और सेवकों को पैदा करने वाली शक्ति है। यानी चेतना का निर्माण करने वालीं।  ये कहा जाता है की कालिदास द्वारा रचित जो रघुवंशम महाकाव्य और मेघदूत रचनाएं  है वो स्कंदमाता की कृपा से ही संभव हुईं है |
 
स्कन्द माता मंत्र
सिंहसनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
 शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी॥
 
मंगलवार २६ सितम्बर २०१७
माता  कात्यायनी

नवरात्रि के षष्ठी के दिन माता  कात्यायनी की पूजा की जाती है। जो भक्त माता कात्यायनी की  उपासना और आराधना करते है उन्हें बड़ी सरलता से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फल प्राप्त हो जाते है | कात्य गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की आराधना  की तथा  कठिन तपस्या की। उनकी ये अभिलाषा थी कि उन्हें पुत्री प्राप्त हो।इसी माता भगवती ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया।जिस कारण यह देवी कात्यायनी कहलाईं। इनकी कृपा से सारे कार्य पूर्ण हो जाते हैं।ब्रज की गोपियां भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाना चाहती थी जिसके के लिए उन्होंने माता कात्यायनी की पूजा की थी | गोपियों ने यह पूजा कालिंदी यमुना के तट पर की थी | इसीलिए माता कात्यायनी ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
माता कात्यायनी का स्वरूप - स्वर्ण के समान चमकीली हैं और भास्वर हैं।
 माता कात्यायनी की -  चार भुजाएं है |
दायीं तरफ का ऊपर वाला हाथ - अभयमुद्रा में है |
नीचे वाला हाथ -  वर मुद्रा में है।
माता  के बाँयी तरफ के ऊपर वाले हाथ -  में तलवार है |
 नीचे वाले हाथ मे  - कमल का फूल सुशोभित है।
माता कात्यायनी का वाहन - सिंह है।
माता कात्यायनी की उपासना करने वालो के  रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं, जन्मों के समस्त पाप से  भी मुक्ति मिल जाती है |  इसलिए कहा जाता है कि इस देवी की उपासना करने से परम पद की प्राप्ति होती है।
 
माता कात्यायनी मंत्र
चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
 कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥

बुधवार २७ सितम्बर २०१७
माता कालरात्रि

नवरात्रि के सप्तमी के दिन माता कालरात्रि की पूजा की जाती है | माता कालरात्रि के नाम लेने से सारी असुरी शक्ति दूर भागने लगती है | माता दुर्गा की सातवीं शक्ति माँ कालरात्रि के नाम से जानी जाती है | माँ कालरात्रि के नाम से ही ये जाहिर है कि इनका रूप भयानक है।

माँ कालरात्रि के शरीर का रंग - घोर अंधकार की भाति  एकदम काला है।
माँ कालरात्रि के केश - बिखरे हुए है |
माँ कालरात्रि के गले में - महा मुंडो की माला है |
माँ कालरात्रि के -तीन नेत्र है जो ब्रह्मांड  के समान गोल है |
माँ कालरात्रि का वाहन - गर्दभ है |
दाईं तरफ का ऊपर वाला हाथ - वरमुद्रा में है |
दाईं तरफ का नीचे वाला हाथ -  अभय मुद्रा में है।
बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में - लोहे का कांटा है |
बाईं तरफ के नीचे वाले हाथ में - खड्ग है |

माता कालरात्रि अंधकारमय स्थितियों का विनाश करने वाली शक्ति हैं |  यही शक्ति काल से भी रक्षा करती है | माता कालरात्रि जब सांस लेती है तो इनकी  सांसों से अग्नि निकलती रहती है।माँ कालरात्रि का  रूप भले ही भयंकर हो लेकिन यह सदैव शुभ फल देने वाली मां हैं। इसीलिए इन्हे शुभंकरी कहा जाता है |  अर्थात इनसे भक्तों को किसी भी प्रकार से भयभीत होने या डरने की कोई आवश्यकता नहीं है । माँ के साक्षात्कार से भक्त पुण्य का भागी बनता है।
माँ कालरात्रि के स्मरण से ही दानव, दैत्य, राक्षस और भूत-प्रेत भाग जाते हैं। यह ग्रह बाधाओं को भी दूर करती हैं और अग्नि, जल, जंतु, शत्रु और रात्रि ये सारे के सारे भय दूर हो जाते हैं।माता की कृपा से भक्त हर तरह के भय से मुक्त हो जाता है।

माँ कालरात्रि मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
 लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
 वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
 वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

ब्रस्पतिवार २८ सितम्बर २०१७ 
 माता महागौरी 
 
माता महागौरी माँ दुर्गा की आठवीं शक्ति है। नवरात्री में अष्टमी के दिन महागौरी की उपासना की जाती है | माता महागौरी  अमोघ फलदायिनी हैं इनकी  उपासना से भक्तो के पूर्वसंचित पाप नष्ट हो जाते हैं। महागौरी की  पूजा-अर्चना, उपासना-आराधना कल्याणकारी है।महागौरी की  कृपा से अलौकिक सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं।इनके नाम से ही  प्रकट होता है कि इनका रूप पूर्णतः गौर वर्ण है। इनकी उपमा चंद्र, शंख, और कुंद के फूल से दी गई है।  महागौरी  की आयु आठ साल मानी गई है।
 
माता महागौरी की -  सभी आभूषण और वस्त्र सफेद हैं।
माता महागौरी की - 4 भुजाएं हैं | 
माता महागौरी का वाहन -  वृषभ है | 
दाईं तरफ का ऊपर वाला हाथ - अभय मुद्रा में है | 
दाईं तरफ का नीचे वाले हाथ में - त्रिशूल धारण किया हुआ है।
बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में - डमरू धारण कर रखा है | 
बाईं तरफ का नीचे वाला हाथ - वर मुद्रा में  है।
 
 माता महागौरी को श्वेताम्बरधरा भी कहा गया है।  इनकी पूरी मुद्रा बहुत ही  शांत है।शिव को पति के  रूप में  प्राप्त करने के लिए महागौरी ने कठोर तपस्या की थी। जिसके कारण इनका शरीर काला पड़ गया था |  भगवान शिव ने माता महागौरी की तपस्या से प्रसन्न होकर इनके शरीर को गंगा के पवित्र जल से धोकर कांतिमय बना दिया था । जिस कारण इनका  रूप गौर वर्ण का हो गया इसीलिए यह महागौरी कहलाईं |  
 
माता  महागौरी मंत्र 
श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
 
शुक्रवार २९ सितम्बर २०१७
माता सिद्धिदात्री
 
माता  सिद्धिदात्री माँ दुर्गाजी की नौवीं शक्ति है नवरात्री के नवमी के दिन इन्हीं माता की पूजा-अर्चना की जाती है |नवमी के दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ माता सिद्धिदात्री की साधना करने वाले साधक  को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है।
भगवान शंकर ने भी माता सिद्धिदात्री  की कृपा से तमाम सिद्धियां प्राप्त की थीं। माता सिद्धिदात्री की कृपा  से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण शिव अर्द्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए। हिमाचल के नंदापर्वत परमाता सिद्धिदात्री का प्रसिद्ध तीर्थ है।महिमा, अणिमा,  लघिमा,गरिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व आठ सिद्धियां होती हैं।माता सिद्धिदात्री की सच्चे मन से विधि विधान से उपासना-आराधना करने से यह सभी सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं।
माता सिद्धिदात्री के
 
दाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में - गदा है |
दाईं तरफ के नीचे वाले हाथ में - चक्र है |
बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में - कमल पुष्प है |
बाईं तरफ के नीचे वाले हाथ में - शंख है |
माता सिद्धिदात्री का वाहन - सिंह है |
 
माता सिद्धिदात्री कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। यह माँ दुर्गा का अंतिम स्वरूप है , इनकी साधना करने से लौकिक और परलौकिक सभी प्रकार की कामनाये पूर्ण हो जाती है | माता सिद्धिदात्री का स्मरण, ध्यान, पूजन हमें इस संसार की असारता का बोध कराते हैं और हमे  अमृत पद की ओर ले जाते हैं।
 
माता सिद्धिदात्री मंत्र
सिद्धगन्‍धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि |
सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी | |
 
 
नवरात्रि पर संदेश
In Hindi

लक्ष्मी का हाथ हो ,
सरस्वती का साथ हो ,
गणेश का निवास हो ,
और माँ दुर्गा का आशीर्वाद हो ,
नवरात्रि की शुभकामनाएं ,

रेशम का हार ,
सावन की सुगंध ,
बारिश की फुहार ,
राधा की उम्मीदें ,
कन्हैया का प्यार ,
मुबारक हो आपको नवरात्रि का त्यौहार ,

सारा जहाँ है जिसकी शरण में ,
नमन है उस माता के चरण में ,
बने उस माता के चरणों की धूल ,
आओ मिलकर चढ़ाये श्रद्धा के फूल ,
नवरात्रि की शुभकामनाये ,

माँ की ज्योति से प्रेम मिलता है ,
सबको दिलो को मर्म मिलता है ,
जो भी जाता है माँ के द्वार ,
कुछ न कुछ जरुर मिलता है ,
नवरात्रि की शुभकामनाये ,

चाँद की चाँदनी ,बसंत की बहार ,
फूलों की खुशबू ,अपनों का प्यार
मुबारक हो आपको नवरात्रि त्यौहार ,
जगत पालन हार है माँ ,
मुक्ति का धाम है माँ ,
हमारी भक्ति का आधार है माँ ,
हम सब की रक्षा की अवतार है माँ ,

कभी न हो आपका ,
दुःखों से सामना ,
पग - पग में माँ दुर्गा का ,
का आशीर्वाद मिले ,
यही है हमारी तरफ से ,
नवरात्रि की शुभकामना ,

शेरा वाली मैया के दरबार में,
सारे दुःख दर्द मिटाये जाते है,
जो भी द्वार पर आते है ,
शरण में ले लिए जाते है,
नवरात्रि की शुभकामनाये ,
 
नवरात्रि पर संदेश

In English
May the great wishes of Goddesses
Give you strength and smiles
May you live with peace and joy
A successful mile after mile

Dandiya raas and lot of fun
the festivities of Navratri have begun
May you be blessed with peace and love
By Maa durga from heaven above
Happy Navratri.

It’s the special time of Navratri
and I don’t want to miss a chance to say
you mean to me more than you
enjoy your Navratri today.

On this individual day of Navratri
I want you to know I miss you today
May Maa bring us together again
Sending wishes and love your way
Happy Navratri

नवरात्रि गीत

दोहा : दरबार तेरा दरबारों में,
एक ख़ास एहमियत रखता है ।
उसको वैसा मिल जाता है,
जो जैसी नियत रखता है ॥
बड़ा प्यारा सजा है द्वार भवानी ।
भक्तों की लगी है कतार भवानी ॥
ऊँचे पर्बत भवन निराला ।
आ के शीश निवावे संसार, भवानी ॥
प्यारा सजा है द्वार भवानी ॥
जगमग जगमग ज्योत जगे है ।
तेरे चरणों में गंगा की धार, भवानी ॥
तेरे भक्तों की लगी है कतार, भवानी ॥
लाल चुनरिया लाल लाल चूड़ा ।
गले लाल फूलों के सोहे हार, भवानी ॥
प्यारा सजा है द्वार, भवानी ॥
सावन महीना मैया झूला झूले ।
देखो रूप कंजको का धार भवानी ॥
प्यारा सजा है द्वार भवानी ॥
पल में भरती झोली खाली ।
तेरे खुले दया के भण्डार, भवानी ॥
तेरे भक्तों की लगी है कतार, भवानी ॥


 

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