Lathmar Holi in Barsana And Nandganv

Lathmar Holi in Barsana And Nandganv
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Friday, 22 March 2013
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  • Replied to the braj ki holi
    Rango ke tyohar mein sabhi rango ki ho bharmar, Dher saari khushiyon se bhara ho aapka sansar, Yahi dua hai bhagwan se hamari har bar, Holi Mubarak h
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  • Replied to the Lathmaar Holi
    Aise manana Holi ka tyohar Pichkari se barse sirf pyar. Ye hai mauka apno se gale mitane ka To gulal or rang lekar ho jao taiyar HAPPY HOLI
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  • Replied to the Lathmar Holi 2014
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  • sujata mishra added a new photo in the group album Barsana holi images 2014
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    brij ki holi greeting cards
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  • holi barsana dham austin, Austin 00:56
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  • RADHAKRISHNA BARSANA HOLI 09:02
    RADHAKRISHNA BARSANA HOLI SARASBRIWASI RADHA BALLABH BHAJAN SINGER & MUSIC COMPOSIER CONT. 09828511233, 09828511244
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  • sujata mishra added 2 new photos in the group album Barsana holi photo
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    Barsana holi photo
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  • Posted a new discussion, holi ki prachin kahani
    होली के पर्व से अनेक कहानियाँ जुड़ी हुई हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्ध कहानी है प्रह्लाद की। माना जाता है कि प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु नाम का एक अत्यंत ...
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      ब्रज की होली की रसधारा से जुड़ा एक तीर्थ है बरसाना। फागुन शुक्ला नवमी के दिन नंदगांव के हुरिहारे कृष्ण और उनके सखा बनकर राधा के गांव बरसाने जाते ...
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    होली ब्रज में अनुराग, उल्लास, हास-परिहास का रमणीय आनंद लेकर अवतरित होती है। रस-रंग का महकता आह्लाद ब्रजभूमि के घर-घर का उत्सव बन जाता है। बनावटी लोक म ...
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  • ब्रज के बरसाना गाँव में होली एक अलग तरह से खेली जाती है जिसे लठमार होली कहते हैं। ब्रज में वैसे भी होली ख़ास मस्ती भरी होती है क्योंकि इसे कृष्ण और राधा के प्रेम से जोड़ कर देखा जाता है। कृष्ण नंदगाँव के थे और राधा बरसाने की थीं। नंदगाँव की टोलियाँ जब पिचकारियाँ लिए बरसाना पहुँचती हैं तो उनपर बरसाने की महिलाएँ खूब लाठियाँ बरसाती हैं।
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    Holi is one of the most ancient festivals in India. It was originally named as 'Holika’. It is celebrated in most of the parts of the country. The cel ...
    groups.discussion 493 days ago

ब्रज के बरसाना गाँव में होली एक अलग तरह से खेली जाती है जिसे लठमार होली कहते हैं। ब्रज में वैसे भी होली ख़ास मस्ती भरी होती है क्योंकि इसे कृष्ण और राधा के प्रेम से जोड़ कर देखा जाता है। यहाँ की होली में मुख्यतः नंदगाँव के पुरूष और बरसाने की महिलाएं भाग लेती हैं, क्योंकि कृष्ण नंदगाँव के थे और राधा बरसाने की थीं। नंदगाँव की टोलियाँ जब पिचकारियाँ लिए बरसाना पहुँचती हैं तो उनपर बरसाने की महिलाएँ खूब लाठियाँ बरसाती हैं। पुरुषों को इन लाठियों से बचना होता है और साथ ही महिलाओं को रंगों से भिगोना होता है। नंदगाँव और बरसाने के लोगों का विश्वास है कि होली का लाठियों से किसी को चोट नहीं लगती है। अगर चोट लगती भी है तो लोग घाव पर मिट्टी मलकर फ़िर शुरु हो जाते हैं। इस दौरान भाँग और ठंडाई का भी ख़ूब इंतज़ाम होता है। कीर्तन मण्डलियाँ "कान्हा बरसाने में आई जइयो बुलाए गई राधा प्यारी", "फाग खेलन आए हैं नटवर नंद किशोर" और "उड़त गुलाल लाल भए बदरा" जैसे गीत गाती हैं। कहा जाता है कि "सब जग होरी, जा ब्रज होरा" याने ब्रज की होली सबसे अनूठी होती है। मथुरा में खेली जाने वाली इस लठ्ठ मार होली को देखने के लिये दूर-दूर से देश और विदेशो से लोग आते हैं। साथ ही मथुरा की खास परंपरा है कि लठ्ठमार होली के एक दिन यहां पर लड्डूमार होली भी होती है। जिसमें लोग एक दूसरे पर लड्डू फेंक कर

ब्रज के बरसाना गाँव में होली एक अलग तरह से खेली जाती है जिसे लठमार होली कहते हैं। ब्रज में वैसे भी होली ख़ास मस्ती भरी होती है क्योंकि इसे कृष्ण और राधा के प्रेम से जोड़ कर देखा जाता है। यहाँ की होली में मुख्यतः नंदगाँव के पुरूष और बरसाने की महिलाएं भाग लेती हैं, क्योंकि कृष्ण नंदगाँव के थे और राधा बरसाने की थीं। नंदगाँव की टोलियाँ जब पिचकारियाँ लिए बरसाना पहुँचती हैं तो उनपर बरसाने की महिलाएँ खूब लाठियाँ बरसाती हैं। पुरुषों को इन लाठियों से बचना होता है और साथ ही महिलाओं को रंगों से भिगोना होता है। नंदगाँव और बरसाने के लोगों का विश्वास है कि होली का लाठियों से किसी को चोट नहीं लगती है। अगर चोट लगती भी है तो लोग घाव पर मिट्टी मलकर फ़िर शुरु हो जाते हैं। इस दौरान भाँग और ठंडाई का भी ख़ूब इंतज़ाम होता है। होली मनाते और नांचते गाते हैं। बरसाना की होली की विचित्रता देखते ही बनती है। कहा जाता है कि यहीं पर भगवान श्री कृष्‍ण ने गोपियों को घेरा था। यहां पर भादों सुदी अष्‍टमी राधा के जन्‍म दिवस पर विशाल मेला लगता है। इसी प्रकार फाल्‍गुन शुक्‍ला अष्‍टमी , नवमी एवं दशमी को होली की लीला होती है।
 
Saturday, 23 March 2013 by shashi jha
ब्रज में होली का रस-रंग आज भी अपनी सांस्कृतिक पारंपरिक पहचान बनाए हुए हैं। रोजी-रोटी के कठोर संघर्ष में डूबे लोग साल भर कितने भी उदास रहें परंतु होली पर तो सारे तनावों को उतार-फेंककर एक मस्ती के आलम में खो जाते हैं। हर घर की बाला गोपी बन जाती है। हर युवा कृष्ण का सखा बनकर छेड़खानी-ठिठोली, हास-परिहास को अपना धर्म मान लेता है। 
 
होली क्या आती है, मदमस्त हो जाती है, ब्रज-धरनी। ब्रज ललनाएं अंग-प्रत्यंग से मटक-मटक कर, सैनों से चटक-मटक-चटकारे लेती हुई गाने लग जाती हैं - 'ससुर मोय देवर सो लागे।' ब्रज के वैष्णव देवालयों में भी होली उत्सव पूरे माह चलते हैं जिसमें प्राचीन भारतवासियों के मन्मथपूजन, गायन-वादन एवं नृत्य के समस्त फागुन के उत्सव आज भी जीवित हैं। ब्रज में होली का रस-रंग आज भी अपनी सांस्कृतिक पारंपरिक पहचान बनाए हुए हैं। रोजी-रोटी के कठोर संघर्ष में डूबे लोग साल भर कितने भी उदास रहें परंतु होली पर तो सारे तनावों को उतार-फेंककर एक मस्ती के आलम में खो जाते हैं। हर घर की बाला गोपी बन जाती है। हर युवा कृष्ण का सखा बनकर छेड़खानी-ठिठोली, हास-परिहास को अपना धर्म मान लेता है। 
 
Rango ke tyohar mein sabhi rango ki ho bharmar, Dher saari khushiyon se bhara ho aapka sansar, Yahi dua hai bhagwan se hamari har bar, Holi Mubarak ho mere yaar!
Last replied by Gaurav on Saturday, 15 March 2014
Aise manana Holi ka tyohar Pichkari se barse sirf pyar. Ye hai mauka apno se gale mitane ka To gulal or rang lekar ho jao taiyar HAPPY HOLI
Last replied by Gaurav on Saturday, 15 March 2014