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Raksha bandhan essay in hindi

Monday, 25 June 2012

 Raksha bandhan essay in hindi 

 

आधिकारिक नाम - रक्षाबंधन

अन्य नाम - राखी सलूनो श्रावणी

अनुयायी - हिन्दू और लगभग सभी भारतीय

प्रकार - धार्मिक, सामाजिक भारतीय

उद्देश्य - भ्रातृभावना और सहयोग

आरम्भ - पौराणिक काल में

तिथि - श्रावण पूर्णिमा

अनुष्ठान - पूजा, प्रसाद

उत्सव -  राखी बांधना, उपहार, भोज 

 

 हिन्‍दू श्रावण मास (जुलाई-अगस्‍त) के पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला यह त्‍यौहार भाई का बहन के प्रति प्‍यार का प्रतीक है। इस दिन बहन अपने भाइयों की कलाई में राखी बांधती है और उनकी दीर्घायु व प्रसन्‍नता के लिए प्रार्थना करती हैं ताकि विपत्ति के दौरान वे अपनी बहन की रक्षा कर सकें। बदले में भाई, अपनी बहनों की हर प्रकार के अहित से रक्षा करने का वचन उपहार के रूप में देते हैं। इन राखियों के बीच शुभ भावनाओं की पवित्र भावना होती है। यह त्‍यौहार मुख्‍यत: उत्‍तर भारत में मनाया जाता है।

 

रक्षा बंधन का इतिहास हिंदू पुराण कथाओं में है। हिंदू पुराण कथाओं के अनुसार, महाभारत में, (जो कि एक महान भारतीय महाकाव्‍य है) पांडवों की पत्‍नी द्रौपदी ने भगवान कृष्‍ण की कलाई से बहते खून (श्री कृष्‍ण ने भूल से खुद को जख्‍मी कर दिया था) को रोकने के लिए अपनी साड़ी का किनारा फाड़ कर बांधा था। इस प्रकार उन दोनो के बीच भाई और बहन का बंधन विकसित हुआ था, तथा श्री कृष्‍ण ने उसकी रक्षा करने का वचन दिया था।

मंत्र  

येना बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः;

तेना त्वं अनुबध्नामी रक्षी माँ चला माँ चला ! 

अनुष्ठान - 

प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर लड़कियाँ और महिलाएँ पूजा की थाली सजाती हैं। थाली में राखी के साथ रोली या हल्दी, चावल, दीपक, मिठाई और कुछ पैसे भी होते हैं। लड़के और पुरुष तैयार होकर टीका करवाने के लिए पूजा या किसी उपयुक्त स्थान पर बैठते हैं। पहले अभीष्ट देवता की पूजा की जाती है, इसके बाद रोली या हल्दी से भाई का टीक करके चावल को टीके पर लगाया जाता है और सिर पर छिड़का जाता है, उसकी आरती उतारी जाती है, दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है और पैसों से नयौछावर कर के उन्हें गरीबों में बाँट दिया जाता है। भारत के अनेक प्रांतों में भाई के कान के ऊपर भोजली या भुजरियाँ लगाने की प्रथा भी है। भाई बहन को उपहार या धन देता है। इस प्रकार रक्षाबंधन के अनुष्ठान के पूरा होने पर भोजन किया जाता है। प्रत्येक पर्व की तरह उपहारों और खाने-पीने की विशेष महत्व रक्षाबंधन में भी होता है। आमतौर पर दोपहर का भोजन महत्वपूर्ण होता है और रक्षाबंधन के अनुष्ठान के पूरा होने तक व्रत रखने की भी परंपरा है। पुरोहित तथा आचार्य सुबह सुबह ही यजमानों के घर पहुंचकर उन्हें राखी बांधते हैं और बदले में धन वस्त्र और भोजन आदि प्राप्त करते हैं। यह पर्व भारतीय समाज में इतनी व्यापकता और गहराई से समाया हुआ है कि इसका सामाजिक महत्व तो है ही, धर्म, पुराण, इतिहास, साहित्य और फ़िल्में भी इससे अछूते नहीं हैं। 

 

सामाजिक प्रसंग - 

इस दिन बहनें अपने भाई के दायें हाथ पर राखी बांधकर उसके माथे पर तिलक करती हैं और उसकी दीर्घ आयु की कामना करती हैं। बदले में भाई उनकी रक्षा का वचन देता है। ऐसा माना जाता है कि राखी के रंगबिरंगे धागे भाई-बहन के प्यार के बंधन को मज़बूत करते है। भाई बहन एक दूसरे को मिठाई खिलाते है। और सुख दुख में साथ रहने का यकीन दिलाते हैं। यह एक ऐसा पावन पर्व है जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को पूरा आदर और सम्मान देता है।

सगे भाई बहन के अतिरिक्त अनेक भावनात्मक रिश्ते भी इस पर्व से बंधे होते हैं जो धर्म, जाति और देश की सीमाओं से भी परे होते हैं।रक्षाबंधन का पर्व भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के निवास पर भी मनाया जाता है। जहाँ छोटे बच्चे उन्हें राखी बाँधते हैं। रक्षा बंधन आत्मीयता और स्नेह के बंधन से रिश्तों को मज़बूती प्रदान करने का पर्व है। यही कारण है कि इस अवसर पर न केवल बहन भाई को ही नहीं अन्य संबंधों में भी रक्षा (या राखी) बांधने के प्रचलन है। गुरू शिष्य को रक्षासूत्र बाँधता है तो शिष्य गुरू को। भारत में प्राचीन काल में जब स्नातक अपनी शिक्षा पूरी करने के पश्चात गुरुकुल से विदा लेता था तो वह आचार्य का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उसे रक्षा सूत्र बाँधता था जबकि आचार्य अपने विद्यार्थी को इस कामना के साथ रक्षासूत्र बाँधता था कि उसने जो ज्ञान प्राप्त किया है वह अपने भावी जीवन में उसका समुचित ढंग से प्रयोग करे ताकि वह अपने ज्ञान के साथ-साथ आचार्य की गरिमा की रक्षा करने में भी सफल हो। इसी परंपरा के अनुरूप आज भी किसी धार्मिक विधि विधान से पूर्व पुरोहित यजमान को रक्षा सूत्र बाँधता है और यजमान पुरोहित को। इस प्रकार दोनों एक दूसरे के सम्मान की रक्षा करने के लिए परस्पर एक दूसरे को अपने बंधन में बाँधते हैं।

रक्षाबंधन पर्व सामाजिक और पारिवारिक एकबद्धता या एकसूत्रता का सांस्कृतिक उपाय रहा है। विवाह के बाद बहन पराए घर में चली जाती है। इस बहाने प्रतिवर्ष अपने सगे ही नहीं दूरदराज के भाइयों तक को रक्षा बांधती है और इस प्रकार अपने रिश्तों का नवीनीकरण करती रहती है। दो परिवारों का और कुलों का जु़डाव होता है। समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भी एकसूत्रता के रूप में इस पर्व का उपयोग किया जाता है। जो कड़ी टूट गई है उसे फिर से जागृत किया जा सकता है।

रक्षाबंधन के अवसर पर कुछ विशेष पकवान भी बनाए जाते हैं जैसे घेवर, शकरपारे, नमकपारे और घुघनी। घेवर सावन का विशेष मिष्ठान्न है यह केवल हलवाई ही बनाते हैं जबकि शकरपारे और नमकपारे आमतौर पर घर में ही बनाए जाते हैं। घुघनी बनाने के लिए काले चने को उबालकर चटपटा छौंका जाता है। इसको पूरी और दही के साथ खाते हैं। हलवा और खीर भी इस पर्व के लोकप्रिय पकवान हैं। 

 

धार्मिक प्रसंग - 

उत्तरांचल में इसे श्रावणी कहते हैं। इस दिन यजुर्वेदी द्विजों का उपकर्म होता है। उत्सर्जन, स्नान-विधि, ॠषि-तर्पणादि करके नवीन यज्ञोपवीत धारण किया जाता है। ब्राह्मणों का यह सर्वोपरि त्यौहार माना जाता है। वृत्तिवान् ब्राह्मण अपने यजमानों को यज्ञोपवीत तथा राखी देकर दक्षिणा लेते हैं।

अमरनाथ की अतिविख्यात धार्मिक यात्रा गुरुपूर्णिमा से प्रारंभ होकर रक्षाबंधन के दिन संपूर्ण होती है। कहते हैं इसी दिन यहाँ का हिमानी शिवलिंग भी पूरा होता है। इस दिन अमरनाथ गुफा में प्रत्येक वर्ष मेला भी लगता है|

महाराष्ट्र राज्य में यह त्योहार नारियल पूर्णिमा या श्रावणी के नाम से विख्यात है। इस दिन लोग नदी या समुद्र के तट पर जाकर अपने जनेऊ बदलते हैं और समुद्र की पूजा करते हैं। इस अवसर पर समुद्र के स्वामी वरुण देवता को प्रसन्न करने के लिए नारियल अर्पित करने की परंपरा भी है। यही कारण है कि इस एक दिन के लिए मुंबई के समुद्र तट नारियल के फलों से भर जाते हैं।

राजस्थान में रामराखी और चूड़ाराखी या लूंबा बांधने का रिवाज़ है। रामराखी सामान्य राखी से भिन्न होती है। इसमें लाल डोरे पर एक पीले छींटों वाला फुंदना लगा होता है और केवल भगवान को बांधी जाती है। चूड़ा राखी भाभियों की चूड़ियों में बाँधी जाती है। जोधपुर में राखी के दिन केवल राखी ही नहीं बाँधी जाती, बल्कि दोपहर में पद्मसर और मिनकानाडी पर गोबर[ख] , मिट्टी[ग] और भस्मी[घ] से स्नान कर शरीर को शुद्ध किया जाता है। इसके बाद धर्म तथा वेदों के प्रवचनकर्त्ता अरुंधती, गणपति, दुर्गा, गोभिला तथा सप्तर्षियों के दर्भ के चट(पूजास्थल) बनाकर मंत्रोच्चारण के साथ पूजा की जाती हैं। उनका तर्पण कर पितृॠण चुकाया जाता है। धार्मिक अनुष्ठान करने के बाद घर आकर हवन किया जाता है, वहीं रेशमी डोरे से राखी बनाई जाती है। राखी में कच्चे दूध से अभिमंत्रित करते हैं और इसके बाद भोजन का प्रावधान है।

तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र और उड़ीसा के दक्षिण भारतीय ब्राह्मण इस पर्व को अवनि अवित्तम कहते हैं। यज्ञोपवीतधारी ब्राह्मणों के लिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन नदी या समुद्र के तट पर स्नान करने के बाद ऋषियों का तर्णण कर नया यज्ञोपवीत धारण किया जाता है। गये वर्ष के पुराने पापों को पुराने यज्ञोपवीत की भांति त्याग देने और स्वच्छ नवीन यज्ञोपवीत की भांति नया जीवन प्रारंभ करने की प्रतिज्ञा ली जाती है। इस दिन यजुर्वेदीय ब्राह्मण 6 महीनों के लिए वेद का अध्ययन प्रारंभ करते हैं। इस पर्व का एक नाम उपक्रमण भी है जिसका अर्थ है- नई शुरूआत व्रज में हरियाली तीज (श्रावण शुक्ल तृतीया) से श्रावणी पूर्णिमा तक समस्त मंदिरों एवं घरों में ठाकुर झूले में विराजमान होते हैं। रक्षाबंधन वाले दिन झूलन-दर्शन समाप्त होते हैं। 

 

पौराणिक प्रसंग -

राखी का त्योहार कब शुरू हुआ यह कोई नहीं जानता। लेकिन भविष्य पुराण में वर्णन है कि देव और दानवों में जब युध्द शुरू हुआ तब दानव हावी होते नज़र आने लगे। भगवान इन्द्र घबरा कर बृहस्पति के पास गये। वहां बैठी इंद्र की पत्नी इंद्राणी सब सुन रही थी। उन्होंने रेशम का धागा मंत्रों की शक्ति से पवित्र कर के अपने पति के हाथ पर बांध दिया। वह श्रावण पूर्णिमा का दिन था। लोगों का विश्वास है कि इंद्र इस लड़ाई में इसी धागे की मंत्र शक्ति से विजयी हुए थे। उसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन यह धागा बांधने की प्रथा चली आ रही है। यह धागा धन,शक्ति, हर्ष और विजय देने में पूरी तरह समर्थ माना जाता है।

स्कन्ध पुराण, पद्मपुराण और श्रीमद्भागवत में वामनावतार नामक कथा में रक्षाबन्धन का प्रसंग मिलता है। कथा कुछ इस प्रकार है- दानवेन्द्र राजा बलि ने जब 100 यज्ञ पूर्ण कर स्वर्ग का राज्य छीनने का प्रयत्न किया तो इन्द्र आदि देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थ्रना की। तब भगवान ने वामन अबतार लेकर ब्राम्हण का वेष धारण कर राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंचे। गुरु के मना करने पर भी बलि ने तीन पग भूमि दान कर दी। भगवान ने तीन पग में सारा अकाष पाताल और धरती नाप कर राजा बलि को रसातल में भेज दिया। इस प्रकार भगवान विष्णु द्वारा बलि राजा के अभिमान को चकानाचूर कर देने के कारण यह त्योहार 'बलेव' नाम से भी प्रसिद्ध है। कहते हैं कि जब बाली रसातल में चला गया तब बलि ने अपनी भक्ति के बल से भगवान को रात-दिन अपने सामने रहने का वचन ले लिया।[ङ] भगवान के घर न लौटने से परेशान लक्ष्मी जी को नारद जी ने एक उपाय बताया। उस उपाय का पालन करते हुए लक्ष्मी जी ने राजा बलि के पास जाकर उसे रक्षाबन्धन बांधकर अपना भाई बनाया और अपने पति भगवान बलि को अपने साथ ले आयीं। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी। विष्णु पुराण के एक प्रसंग में कहा गया है कि श्रावण की पूर्णिमा के दिन भागवान विष्णु ने हयग्रीव के रूप में अवतार लेकर वेदों को ब्रह्मा के लिए फिर से प्राप्त किया था। हयग्रीव को विद्या और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

 

ऐतिहासिक प्रसंग -  

राजपूत जब लड़ाई पर जाते थे तब महिलाएं उनको माथे पर कुमकुम तिलक लगाने के साथ साथ हाथ में रेशमी धागा भी बांधती थी। इस विश्वास के साथ कि यह धागा उन्हे विजयश्री के साथ वापस ले आएगा। राखी के साथ एक और प्रसिद्ध कहानी जुड़ी हुयी है। कहते हैं, मेवाड़ की महारानी कर्मावती को बहादुरशाह द्वारा मेवाड़ पर हमला करने की पूर्वसूचना मिली। रानी लड़ऩे में असमर्थ थी। उसने मुगल राजा हुमायूं को राखी भेज कर रक्षा की याचना की। हुमायूँ ने मुसलमान होते हुए भी राखी की लाज रखी और मेवाड़ पहुँच कर बहादुरशाह के विरूद्ध मेवाड़ की ओर से लड़ते हुए कर्मावती और उसके राज्य की रक्षा की। कहते है सिकंदर की पत्नी ने अपने पति के हिंदू शत्रु पुरूवास को राखी बांध कर अपना मुंहबोला भाई बनाया और युद्ध के समय सिकंदर को न मारने का वचन लिया। पुरूवास ने युद्ध के दौरान हाथ में बंधी राखी का और अपनी बहन को दिये हुए वचन का सम्मान करते हुए सिकंदर को जीवदान दिया।

महाभारत में भी इस बात का उल्लेख है कि जब ज्येष्ठ पाण्डव, युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं सभी संकटों को पार कैसे कर सकता हूँ तब भगवान कृष्ण ने उनकी तथा उनकी सेना की रक्षा के लिए राखी का त्योहार मनाने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि राखी के इस रेशमी धागे में वह शक्ति है जिससे आप हर आपत्ति से बहार आ सकते हैं। इस समय द्रौपदी द्वारा कृष्ण को तथा कुन्ती द्वारा अभिमन्यु को राखी बांधने के उल्लेख मिलते हैं। महाभारत में ही रक्षाबंधन से संबंधित कृष्ण और द्रौपदी का एक और वृत्तांत मिलता है। जब कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई। द्रौपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उँगली पर पट्टी बाँध दी। यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। कृष्ण ने इस उपकार का बदला बाद में चीरहरण के समय उनकी साड़ी को बढ़ाकर चुकाया। कहते हैं परस्पर एक दूसरे की रक्षा और सहयोग की भावना रक्षाबंधन के पर्व में यहीं से आन मिली|

 

साहित्यिक प्रसंग -

अनेक साहित्यिक ग्रंथ ऐसे हैं जिनमें रक्षाबंधन के पर्व का विस्तृत वर्णन मिलता है। इनमें सबसे अधिक महत्वपूर्ण है हरिकृष्ण प्रेमी का ऐतिहासिक नाटक रक्षाबंधन जिसका 1991 में 18वाँ संस्करण प्रकाशित हो चुका है। मराठी में शिंदे साम्राज्य के विषय में लिखते हुए रामराव सुभानराव बर्गे ने भी एक नाटक लिखा है जिसका शीर्षक है राखी ऊर्फ रक्षाबंधन। पचास और साठ के दशक में रक्षाबंधन हिंदी फ़िल्मों का लोकप्रिय विषय बना रहा। ना सिर्फ़ 'राखी' नाम से बल्कि 'रक्षाबंधन' नाम से भी फ़िल्‍म बनाई गई। 'राखी' नाम से दो बार फ़िल्‍म बनी, एक बार सन 1949 में, दूसरी बार सन 1962 में, सन 62 में आई फ़िल्‍म को ए. भीमसिंह ने बनाया था, कलाकार थे अशोक कुमार, वहीदा रहमान, प्रदीप कुमार और अमिता। इस फ़िल्‍म में राजेंद्र कृष्‍ण ने शीर्षक गीत लिखा था- 'राखी धागों का त्‍यौहार'। सन 1972 में एस.एम.सागर ने फ़िल्‍म बनाई थी 'राखी और हथकड़ी' इसमें आर.डी.बर्मन का संगीत था। सन 1976 में राधाकांत शर्मा ने फ़िल्‍म बनाई 'राखी और राइफल'। दारा सिंह के अभिनय वाली यह एक मसाला फ़िल्‍म थी। इसी तरह से सन 1976 में ही शांतिलाल सोनी ने सचिन और सारिका को लेकर फ़िल्‍म 'रक्षाबंधन' नाम की बनाई। 

 

सरकारी प्रबंध - 

भारत सरकार के डाक-तार विभाग द्वारा इस अवसर पर दस रुपए वाले आकर्षक लिफाफों की बिक्री की जाती हैं। लिफाफे की कीमत 5 रुपए और 5 रुपए डाक का शुल्क। इसमें राखी पर बहनें, भाई को मात्र पांच रुपए में एक साथ तीन-चार राखियाँ भेज सकती हैं। डाक विभाग की ओर से बहनों को दिए इस तोहफे के तहत 50 ग्राम वजन तक राखी का लिफाफा पांच रुपए में भेजा जा सकता है जबकि सामान्य 20 ग्राम के लिफाफे में एक राखी ही भेजी जा सकती है। यह सुविधा रक्षाबंधन तक ही उपलब्ध रहती है। रक्षाबंधन के अवसर पर बरसात के मौसम का ध्यान रखते हुए डाक-तार विभाग ने 2007 से बारिश से ख़राब न होने वाले वाटरप्रूफ लिफाफे उपलब्ध कराए हैं। ये लिफाफे अन्य लिफाफों से भिन्न हैं। इसका आकार और डिजाइन भी अलग है और इसके अलग डिजाइन के कारण राखी इसमें ज्यादा सुरक्षित रहती है। डाक-तार विभाग पर रक्षाबंधन के अवसर पर 20 प्रतिशत अधिक काम का बोझ पड़ता है। अतः राखी को सुरक्षित और तेजी से पहुँचाने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं और काम के हिसाब से इसमें सेवानिवृत डाककर्मियों की भी सेवा ली जाती है। कुछ बड़े शहरों के बड़े डाकघरों में राखी के लिए अलग से बाक्स भी लगाए जाते हैं। इसके साथ ही चुनिन्दा डाकघरों में सम्पर्क करने वाले लोगों को राखी बेचने की भी इजाजत दी जाती है, ताकि लोग वहीं से राखी खरीद कर निर्धारित स्थान को भेज सकें।

 

राखी और आधुनिक तकनीकी माध्यम - 

आज के आधुनिक तकनीकी युग एवं सूचना संप्रेषण युग का प्रभाव राखी जैसे त्योहार पर भी पड़ा है। कई सारे भारतीय आजकल विदेश में रहते हैं एवं उनके परिवार वाले (भाई एवं बहन) अभी भी भारत या अन्य देशों में हैं। इंटरनेट के आने के बाद कई सारी ई-कॉमर्स साइट खुल गईं हैं जो ऑनलाइन आर्डर मंजूर करती हैं एवं राखी दिये गये पते पर पहुँचा दी जाती है। इसके अतिरिक्त भारत में 2007 राखी के अवसर पर इस पर्व से संबंधित एक एनीमेटेड सीडी भी आई है जिसमें एक बहन द्वारा भाई को टीका करने व राखी बाँधने का चलचित्र है। यह सीडी राखी के अवसर पर अनेक बहनों ने दूर रहने वाले अपने भाइयों को भेजी।

 

रक्षा बंधन भाई और बहन के पवित्र रिश्ते को मनाने का त्यौहार है. इस त्यौहार पर निम्नलिखित कार्यों को करकर आप अपनी राखी का त्यौहार यादगार बना सकते हैं.

अगर आप सच में कुछ यूनीक और स्पेशल करना चाहते हैं तो इस बार राखी किसी अनाथालय या वृद्दाश्रम में मनाइए. सभी से राखी बंधवाइए और गिफ्ट्स आंड स्वीट्स डिसट्रिब्यूट कीजिये. इससे मिलने वाली ख़ुशी कुछ अलग ही होगी .


हॅंड मेड रखी और हॅंड मेड रखी ग्रीटिंग कार्ड्स से बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता. और ये सब करना इतना मुश्किल भी नहीं है. अगर आपका भाई एक किड है तो आप कार्टून फिगर्स का उसे करके रखी और ग्रीटिंग कार्ड्स बना सकती है. ग्रीटिंग कार्ड में कुछ थॉटफुल और क्यूट से मेसेजस, पोवेम्स लिखिए और रखी और कार्ड को कोलोरफुल पेपर फ्लवर्स, बीड्स, ग्लिट्टर,  कार्टून फिगर्स, इमेजस आदि से डेकरेट कीजिये.


भाई बहन के साथ अपनी बचपन की यादों को समेटता हुआ एक फोटो कलाज या वीडियो बना सकते हैं. बचपन से लेकर अब तक की सभी पिक्चर्स को इसमें शामिल कीजिये. अपने ब्रदर या सिस्टर को गिफ्ट कीजिये. यह सच में बहुत सर्प्राइज़िंग होगा  .


बहन अपने भाई की पसंद को ध्यान में रखते हुए कुछ स्पेशल डिशस बना सकती है या फिर भाई रेस्टोरेंट में अपने सभी सिब्लिंग्स के लिए एक ग्रांड लंच या डिन्नर पार्टी प्लान कर सकते हैं.


सभी रिलेटिव्स के लिए आप एक छोटा सा फंक्षन भी प्लान कर सकते हैं. डॅन्सिंग, सॉंग्स, इंट्रेस्टिंग गेम्स, जोक्स आदि को इस फंक्षन का हिस्सा बनाइये और एंजाय कीजिये. आप फॅमिली पिक्निक भी प्लान कर सकते हैं.


गिफ्ट्स के बिना किसी फेस्टिवल की कल्पना नहीं की जा सकती. यह जरुरी नहीं है कि अपने बजेट से बाहर जाकर आप कोई एक्सपेन्सिव सा गिफ्ट ख़रीदे. गिफ्ट जो भी दें अपने दिल से दें क्योंकि गिफ्ट देने के पीछे जो फीलिंग्स है वह सबसे ज्यादा मायने रखती है और जिसे गिफ्ट दे रहे है उसकी पसंद का ख़याल भी रखें.

 

अपने किड ब्रदर के लिए आप गेम्स, टाय्स, किड्स वेआरींग्स, चॉक्लेट्स, स्पोर्ट्स वॉच एट्सेटरा. सेलेक्ट कर सकती हैं और अपने एल्डर ब्रदर के लिए शर्ट्स, वॉचस, मोबाइल्स, परफ्यूम्स, पोर्टफोलीयो बॅग्स, नॉवेल्स, लेदर जॅकेट्स, वॉलेट्स, बेल्ट्स, टीएस आंड कफ लिंक्स एट्सेटरा. में से कुछ सेलेक्ट कर सकती हैं.

 

अपनी किड सिस्टर के लिए आप क्यूट टेडी बेर्ज़, चॉक्लेट्स, बार्बी डॉल्स और किड्स वेर्ज़ आदि में से कुछ सेलेक्ट कर सकते हैं और अपनी एल्डर सिस्टर के लिए ज्यूयेल्री आइटम्स जैसे रिंग, ब्रेस्लेट, अंक्लेट, इयररिंग्स, नेकलेस या परफ्यूम्स, फॅन्सी टॉप्स , एत्निक आउटफिट एट्सेटरा. में से कुछ चूज़ कर सकते हैं.

 

अगर आपकी बहन या भाई काफी लम्बे समय से कुछ खरीदने की प्लॅनिंग कर रही/ रहा है पर अभी तक खरीद नहीं पायी / पाया है तो आप राखी के इस अवसर पर वहीँ चीज़ उसे गिफ्ट कर सकते हैं.  यह उसके लिए  Surprise  होगा .

 

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