Lohri (Lodi), लोहड़ी, Lohri songs, Lohri 2015, Lohri Festival of India, Lohri Festival , Lohri Festival, Lohri Celebration, Lohri Celebration 2015, Harvest Festival of Punjab, Lohri invitation cards, Lohri images animated
Go to group page

Essay on Lohri festival in Hindi

Tuesday, 08 January 2013

Essay on Lohri festival in Hindi 

 

 

लोहड़ी त्यौहार

 

लोहड़ी का त्यौहार पंजाबियों तथा हरयानी लोगो का प्रमुख त्यौहार माना जाता है ! यह लोहड़ी का त्यौहार पंजाब, हरियाणा , दिल्ली, जम्मू काश्मीर और हिमांचल में धूम धाम तथा हर्षो लाश के साथ मनाया जाता हैं ! यह त्यौहार मकर संक्राति से एक दिन पहले 13 जनवरी को हर वर्ष मनाया जाता हैं ! 

लोहड़ी त्यौहार के उत्पत्ति के बारे में काफी मान्यताएं हैं जो की पंजाब के त्यौहार से जुडी हुई मानी जाती हैं ! 

कई लोगो का मानना हैं की यह त्यौहार जाड़े की ऋतू के आने का द्योतक के रूप में मनाया जाता हैं ! आधुनिक युग में अब यह लोहड़ी का त्यौहार सिर्फ पंजाब, हरियाणा , दिल्ली, जम्मू काश्मीर और हिमांचल में ही नहीं अपितु बंगाल तथा उड़िया लोगो द्वारा भी मनाया जा रहा हैं ! 

लोहड़ी का त्यौहार और भारतीय आधार  

लोहड़ी ठण्ड के आने का द्योतक तथा पंजाबी संस्कृति को प्रदर्शित करता हैं ! पौराणिक मान्यता के अनुसार लोहड़ी जाड़े के मौसम की शुरुआत के पहले का एक दिन माना जाता हैं ! और यह भी मान्यता हैं की यह लोहड़ी का त्यौहार जिस दिन होता हैं उसकी रात उस साल की सबसे लम्बी और बड़ी रात होती हैं और उस रात के बाद जो सुबह आती हैं वह अत्यधिक प्रकाशित और उजाले को बढाती हैं! 

 

लोहड़ी एक मानसून त्यौहार  

लोहड़ी जैसा की जाड़े के समय का त्यौहार हैं इसे ठण्ड के मानसून से जुड़ा हम देख सकते हैं ! इसमें ठण्ड मानसून के प्राकृतिक अवयव ही देखने को मिलते हैं जिसमे आग, हवा, पृथ्वी, मानसून के अनुसार ही मेवे और मिठाइयाँ प्रयोग में लाई जाती हैं जैसे पॉपकॉर्न, मूंगफली,  रेवड़ी , आग में भुने हुए चावल आदि ! 

 

लोहड़ी एक फसलों का त्यौहार 

लोहड़ी को पारम्परिक रूप से रबी की फसल से जोड़ा जाता हैं ! लोग पारम्परिक तौर पर अपने धार्मिक स्थान पर मूंगफली, आटा , रेवड़ी, मक्खन आदि चीजों को चढाते हैं और अपने अच्छी फसल के लिए भगवान् को धन्यवाद प्रदान करते हैं !  

 

लोहड़ी का त्यौहार एक आर्थिक नया साल 

 

लोहड़ी को लोग बहुत ही महत्वपूर्ण दिवस माना जाता हैं क्योंकि लोग इस त्यौहार के अगले दिन को अपने नए साल का आर्थिक साल और धन और शौभाग्य का प्रतीक दिवस भी मानते हैं !  

 

लोहड़ी का त्यौहार और दुल्ला भट्टी की कहानी 

 

लोहड़ी को दुल्ला भट्टी की एक कहानी से भी जोड़ा जाता हैं ! लोहड़ी की सभी गानों को दुल्ला भट्टी से ही जुड़ा तथा यह भी कह सकते हैं की लोहड़ी के गानों का केंद्र बिंदु दुल्ला भट्टी को ही बनाया जाता हैं !  

दुल्ला भट्टी मुग़ल शासक अकबर के समय में पंजाब में रहता था ! उसे पंजाब के नायक की उपाधि से सम्मानित किया गया था! उस समय संदल बार के जगह पर लड़कियों को गुलामी के लिए बल पूर्वक अमीर लोगों को बेच जाता था जिसे दुल्ला भट्टी ने एक योजना के तहत लड़कियों को न की मुक्त ही करवाया बल्कि उनकी शादी की हिन्दू लडको से करवाई और उनके शादी के सभी व्यवस्था भी करवाई ! 

दुल्ला भट्टी एक विद्रोही था और जिसकी वंशवली भट्टी राजपूत थे ! उसके पूर्वज पिंडी भट्टियों के शासक थे जो की संदल बार में था अब संदल बार पकिस्तान में स्थित हैं ! वह सभी पंजाबियों का नायक था !  

 

लोहड़ी का त्यौहार और अन्य सम्बंधित कहानियाँ 

 
लोई - लोहड़ी को लोई से भी जोड़ा जाता हैं जो की संत कबीर की पत्नी थी ! 
 
लौ - एक और कहानी के अनुसार लोहड़ी शब्द लौ से लिया गया हैं जिसका मतलब प्रकाश तथा आग की गर्माहट को प्रदर्शित करता हैं ! 

तिल और रेवड़ी - तिल और रेवड़ी को लोहड़ी के दिन खाना बहुत ही महत्त्व पूर्ण मानते हैं और तिल + रेवड़ी = तिलोड़ी जो तथा लोहड़ी को इसका संक्षिप्त शब्द कहा जाता हैं ! 

 

लोहड़ी त्यौहार दिन 

लोहड़ी बिक्रमी कैलेंडर के अनुसार पौष के महीने में तथा ग्रेगोरिओन कैलेंडर के अनुसार मकर संक्राति से एक दिन पहले मनाया जाता हैं ! 
 

 

लोहड़ी त्यौहार रीति 

लोहड़ी के दिन बच्चें एक घर से दूसरे घर दुल्ला भट्टी के गाने गेट हुए तथा उसकी प्रशंसा करते हुए जाते हैं!  इन बच्चों को वे जहाँ भी जाते हैं लोग मिठाइयाँ, उपहार तथा धन देकर विदा किया जाता हैं क्योंकि खाली हाथ लौटाना अवनति और दुर्भाग्य को प्रदर्शित करता हैं ! इस प्रकार जमा की गई चीजो को ही लोहड़ी कहते हैं जिसमें मूंगफली , रेवड़ी , गज़क , तिल , मिठाइयाँ , पॉपकॉर्न, गुड़ , चीनी की डली और धन भी होता हैं ! 
 
अलाव भी शाम को जलाये जाते हैं पर यह पंजाब में अलग -2 जगहों पर अलग -2 तरीकों से मनाई जाती हैं ! 
कई जगहों पर गाय के गोबर से लोहड़ी के देवता भी बनाये जाते हैं और सजाये जाते हैं ! फिर उसे आग में नीचे डाल कर उसके बाद उनकी प्रशंसा में गीत गाकर उस अलाव के चारों और सामूहिक  नृत्य करते हैं !
 
पर कहीं 2 पर लोहड़ी के देवता नहीं बनाये जाते ! बस लोहड़ी की आग जलाई जाती हैं जिसमें गाय के गोबड़ के साथ लकड़ी सम्मलित करते हैं ! 
लोहड़ी की आग गाँव में मुख्य चौराहे पर सूर्यास्त के समय जलाई जताई हैं ! लोग लोहड़ी की आग में तिल , गुड़ , मूंगफली , रेवड़ी , गज़क , तिल , मिठाइयाँ , पॉपकॉर्न, गुड़ , चीनी की डली आदि आग में समर्पित करते हैं और इस लोहड़ी की आग के चारों और तब तक गाना और नृत्य करते रहते हैं जब तक की लोहड़ी की आग बुझ नहीं जाती ! 
कुछ लोग आग के चारों ओर घूम कर प्रार्थना भी करते हैं ! ऐसा करके वे ये सम्मान वे प्राकृतिक पञ्च तत्व में से एक अग्नि को प्रदान करते हैं ! लोहड़ी की आग में तिल , गुड़ , मूंगफली , रेवड़ी , गज़क , तिल , मिठाइयाँ , पॉपकॉर्न, गुड़ , चीनी की डली आदि समर्पित करना पारम्परिक तौर पर अनिवार्य होता हैं ! 
हिन्दू भी इस लोहड़ी की आग में ढूध और पानी समर्पित करके अग्नि को सम्मान देते हैं ! यह प्रक्रिया करके लोग भगवान् सूर्य को जीवन चक्र की प्रक्रिया में किये गए सहयोग के लिए धन्यवाद देते हैं और हमेशा अपनी अनुकम्पा लोगों पर बनाये रखे ये आशीर्वाद मांगते हैं ! 

 

लोहड़ी उत्सव

 
लोहड़ी पूरे साल का सबसे ठण्ड को प्रदर्शित करता हैं ! पंजाब के अतिरिक्त अब दिल्ली , जम्मू , हरियाणा, बंगाल आदि जगहों पर भी लोग धूम धाम से यह उत्सव मनाते हैं ! 
अगर किसी के घर में कुछ समय पहले ही अगर शादी या बच्चें का जन्म हुआ हो तो उस घर में लोहड़ी और भी धूम धाम से मनाया जायेगा ! 

लोहड़ी का उत्सव मनाने में लोग लोहड़ी के विशिष्ट गाने गाते हैं ! लोग रंग बिरंगे और चमकीले कपडे पहन कर भंगड़ा और गिद्दा नृत्य ढोल की ताल पर एक साथ करते हैं ! पंजाबी गीतों को सभी हर्ष के साथ गाते और बजाते हैं ! लोहड़ी के रात को लोग सरसों का साग और मक्के की रोटी जो की उनका पारंपरिक भोजन हैं बनाते हैं ! लोहड़ी का उत्सव किसानो के लिए जितना महत्वपूर्ण हैं उसकी प्रकार अर्बन में लोग इसे मेलजोल तथा परिवार और दोस्तों से एक जुटता का प्रतीक मानते हैं !  

 

 by - sujata mishra

 

lohri festival in Hindi language, information of lohri festival in Hindi, history of lohri festival in Hindi, history of lohri in Hindi, history of lohri in Hindi language, lohri information in Hindi, essay on lohri festival in hindi, essay on lohri in hindi

 

No files uploaded