Dhanteras,धनतेरस, Dhanteras 2014,Dhanteras Festival, Dhanwantari Triodasi
Go to group page

Lord Kuber Puja on Dhanteras, Kuber Puja Vidhi, Dhanteras Kuber Puja

No files uploaded

                               

Lord Kuber is worshipped on Dhanteras to seek the blessings of him.Kuber is the God of wealth. Traditionally Kuber is worshipped by trading or business communities of India .Kuber is mostly worshipped in the form of Yantra.This powerful Yantra brings prosperity and happiness in the life of the owner of yantra.The followers of all the three religions- Hinduism, Buddhism and Jainism worships Kuber on Dhanteras.

Puja Procedure

The devotee should wear clean yellow clothes after taking bath with cold water and sit on a yellow mat or facing north.Take a wooden patta and cover it with yellow cloth. Draw a Swastik from kumkum on a steel plate. Light the lamp of ghee and incense sticks. Make a mound of rice on patta and place Kuber yantra over it. Place four different types of fruits around the yantra.Then prayer is offered to Lord Ganpati by chanting - “Om Gam Ganpataye Namah” in eleven times .

Then Chant the mantra

"Om Yakshyaya Kuberaya Vaishravanaaya Dhanadhanyadi Padayeh
Dhana-Dhanya Samreeddhing Me Dehi Dapaya Swaha"

 Importance of Lord Kuber Puja

It is believed that one who worship Lord kuber on dhanteras will never have shortage of wealth and his business will flourish.Lord Kuber showers his blessings on their devotees through kuber yantra.Those who want to get relief from poverty and scarcity of money should worship him on Dhanteras.

Discussion started by Gaurav , on 690 days ago
Replies
Shrishti Arora

धनतेरस पूजन में रखें इनका खास ध्यान
धनतेरस और यम दीपदान का महत्व
धनतेरस पूजन

प्रचलित कथा के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन समुद्र मंथन से आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरी‍ अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्होंने देवताओं को अमृतपान कराकर अमर कर दिया था।

अतः वर्तमान संदर्भ में भी आयु और स्वास्थ्य की कामना से धनतेरस पर भगवान धन्वंतरी‍ का पूजन किया जाता है। इस दिन वैदिक देवता यमराज का पूजन भी किया जाता है।

कई श्रद्धालु इस दिन उपवास रहकर यमराज की कथा का श्रवण भी करते हैं। आज से ही तीन दिन तक चलने वाला गो-त्रिरात्र व्रत भी शुरू होता है।

* इस दिन धन्वंतरी‍ जी का पूजन करें।

* नवीन झाडू एवं सूपड़ा खरीदकर उनका पूजन करें।

* सायंकाल दीपक प्रज्वलित कर घर, दुकान आदि को श्रृंगारित करें।

* मंदिर, गौशाला, नदी के घाट, कुओं, तालाब, बगीचों में भी दीपक लगाएं।

* यथाशक्ति तांबे, पीतल, चांदी के गृह-उपयोगी नवीन बर्तन व आभूषण क्रय करते हैं।

* हल जुती मिट्टी को दूध में भिगोकर उसमें सेमर की शाखा डालकर तीन बार अपने शरीर पर फेरें।

* कार्तिक स्नान करके प्रदोष काल में घाट, गौशाला, बावड़ी, कुआं, मंदिर आदि स्थानों पर तीन दिन तक दीपक जलाएं।

धनतेरस पूजन में क्या करें

(अ) कुबेर पूजन
शुभ मुहूर्त में अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान में नई गादी बिछाएं अथवा पुरानी गादी को ही साफ कर पुनः स्थापित करें।
पश्चात नवीन बसना बिछाएं।

सायंकाल पश्चात तेरह दीपक प्रज्वलित कर तिजोरी में कुबेर का पूजन करते हैं।

कुबेर का ध्यान

निम्न ध्यान मंत्र बोलकर भगवान कुबेर पर फूल चढ़ाएं -

श्रेष्ठ विमान पर विराजमान, गरुड़मणि के समान आभावाले, दोनों हाथों में गदा एवं वर धारण करने वाले, सिर पर श्रेष्ठ मुकुट से अलंकृत तुंदिल शरीर वाले, भगवान शिव के प्रिय मित्र निधीश्वर कुबेर का मैं ध्यान करता हूं।

इसके पश्चात निम्न मंत्र द्वारा चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य से पूजन करें -

'यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये
धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा।'

इसके पश्चात कपूर से आरती उतारकर मंत्र पुष्पांजलि अर्पित करें।

(ब) यम दीपदान

* तेरस के सायंकाल किसी पात्र में तिल के तेल से युक्त दीपक प्रज्वलित करें।

* पश्चात गंध, पुष्प, अक्षत से पूजन कर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके यम से निम्न प्रार्थना करें-

'मृत्युना दंडपाशाभ्याम्‌ कालेन श्यामया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात्‌ सूर्यजः प्रयतां मम।

अब उन दीपकों से यम की प्रसन्नता के लिए सार्वजनिक स्थलों को प्रकाशित करें।

इसी प्रकार एक अखंड दीपक घर के प्रमुख द्वार की देहरी पर किसी प्रकार का अन्न (साबूत गेहूं या चावल आदि) बिछाकर उस पर रखें। (मान्यता है कि इस प्रकार दीपदान करने से यम देवता के पाश और नरक से मुक्ति मिलती है।)

यमराज पूजन

* इस दिन यम के लिए आटे का दीपक बनाकर घर के मुख्य द्वार पर रखें।

* रात को घर की स्त्रियां दीपक में तेल डालकर चार बत्तियां जलाएं।

* जल, रोली, चावल, गुड़, फूल, नैवेद्य आदि सहित दीपक जलाकर यम का पूजन करें।
688 days ago
 
Vikas Mishra
धनतेरस दीपावली से दो दिन पहले मनाई जाती है (Dhanteras Deepawali). जिस प्रकार देवी लक्ष्मी सागर मंथन से उत्पन्न हुई थी उसी प्रकार भगवान धनवन्तरि भी अमृत कलश के साथ सागर मंथन से उत्पन्न हुए हैं. देवी लक्ष्मी धन की देवी हैं परन्तु उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए आपको स्वस्थ्य और लम्बी आयु भी चाहिए यही कारण है दीपावली दो दिन पहले से ही यानी धनतेरस से ही दीपामालाएं सजने लगती हें.
धनतेरस क्यों मनाई जाती है और इसमें बर्तन क्यों खरीदे जाते हैं उसकी कहानी यह है कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि (Kartik Krhishna trayodasi Dhanteras pooja) के दिन ही धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है. धन्वन्तरी जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था. भगवान धन्वन्तरी चुकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है. कहीं कहीं लोकमान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि इस दिन धन (वस्तु) खरीदने से उसमें 13 गुणा वृद्धि होती है. इस अवसर पर धनिया के बीज खरीद कर भी लोग घर में रखते हैं. दीपावली के बाद इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों में या खेतों में बोते हैं.

धनतेरस खरीदारी (Dhanteras Kharidari)
धनतेरस के दिन चांदी खरीदने की भी प्रथा है. इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि यह चन्द्रमा का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है और मन में संतोष रूपी धन का वास होता है. संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है. जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है सुखी है और वही सबसे धनवान है. भगवान धन्वन्तरी जो चिकित्सा के देवता भी हैं उनसे स्वास्थ्य और सेहत की कामना के लिए संतोष रूपी धन से बड़ा कोई धन नहीं है. लोग इस दिन ही दीपावली की रात लक्ष्मी गणेश की पूजा हेतु मूर्ति भी खरीदते हें.

धनतेरह कथा (Dhanteras Katha)
धनतेरस की शाम घर के बाहर मुख्य द्वार पर और आंगन में दीप जलाने की प्रथा भी है. इस प्रथा के पीछे एक लोक कथा है, कथा के अनुसार किसी समय में एक राजा थे जिनका नाम हेम था. दैव कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई. ज्योंतिषियों ने जब बालक की कुण्डली बनाई तो पता चला कि बालक का विवाह जिस दिन होगा उसके ठीक चार दिन के बाद वह मृत्यु को प्राप्त होगा. राज इस बात को जानकर बहुत दुखी हुआ और राजकुमार को ऐसी जगह पर भेज दिया जहां किसी स्त्री की परछाई भी न पड़े. दैवयोग से एक दिन एक राजकुमारी उधर से गुजरी और दोनों एक दूसरे को देखकर मोहित हो गये और उन्होंने गन्धर्व विवाह कर लिया.
विवाह के पश्चात विधि का विधान सामने आया और विवाह के चार दिन बाद यमदूत उस राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचे. जब यमदूत राजकुमार प्राण ले जा रहे थे उस वक्त नवविवाहिता उसकी पत्नी का विलाप सुनकर उनका हृदय भी द्रवित हो उठा परंतु विधि के अनुसार उन्हें अपना कार्य करना पड़ा. यमराज को जब यमदूत यह कह रहे थे उसी वक्त उनमें से एक ने यमदेवता से विनती की हे यमराज क्या कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे मनुष्य अकाल मृत्यु के लेख से मुक्त हो जाए. दूत के इस प्रकार अनुरोध करने से यमदेवता बोले हे दूत अकाल मृत्यु तो कर्म की गति है इससे मुक्ति का एक आसान तरीका मैं तुम्हें बताता हूं सो सुनो. कार्तिक कृष्ण पक्ष की रात जो प्राणी मेरे नाम से पूजन करके दीप माला दक्षिण दिशा की ओर भेट करता है उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है. यही कारण है कि लोग इस दिन घर से बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाकर रखते हैं.

धनवन्तरी पूजा (Dhanvantari Pooja)
धन्वन्तरि देवताओं के वैद्य हैं और चिकित्सा के देवता माने जाते हैं इसलिए चिकित्सकों के लिए धनतेरस का दिन बहुत ही महत्व पूर्ण होता है. धनतेरस के संदर्भ में एक लोक कथा प्रचलित है कि एक बार यमराज ने यमदूतों से पूछा कि प्राणियों को मृत्यु की गोद में सुलाते समय तुम्हारे मन में कभी दया का भाव नहीं आता क्या. दूतों ने यमदेवता के भय से पहले तो कहा कि वह अपना कर्तव्य निभाते है और उनकी आज्ञा का पालन करते हें परंतु जब यमदेवता ने दूतों के मन का भय दूर कर दिया तो उन्होंने कहा कि एक बार राजा हेमा के ब्रह्मचारी पुत्र का प्राण लेते समय उसकी नवविवाहिता पत्नी का विलाप सुनकर हमारा हृदय भी पसीज गया लेकिन विधि के विधान के अनुसार हम चाह कर भी कुछ न कर सके.
688 days ago
 
Shrishti Arora

धनतेरस : राशिनुसार खरीदें शुभ वस्तुएं

धनतेरस के शुभ पर्व पर हर व्यक्ति सुख और समृद्धि के लिए हैसियत के मुताबिक कुछ न कुछ अवश्य खरीदता है। इस दिन अगर राशि के अनुसार खरीदी की जाए तो खरीदी की शुभता बढ़ जाती है। प्रस्तुत है 12 राशियों के लिए धनतेरस खरीदी की विशेष एस्ट्रो सलाह :

* मेष राशि वाले जातक इस दिन तांबा या भूमि खरीदें।

* वृषभ राशि वाले जातक इस दिन चांदी खरीदें।

* मिथुन राशि वाले जातक इस दिन धार्मिक पुस्तक खरीदें।

* कर्क राशि वाले जातक इस दिन दक्षिण मुखी (दक्षिणावर्ती) शंख खरीदें।

* सिंह राशि वाले जातक इस दिन मकान खरीदें या मकान के लिए डाऊन पेमेंट करें।

* कन्या राशि वाले जातक इस दिन रत्न खरीदें।

* तुला राशि वाले जातक इस दिन हीरा या गाय खरीदें।

* वृश्चिक राशि वाले जातक इस दिन जमीन या घर खरीदें।

* धनु राशि वाले जातक इस दिन सोना खरीदें।

* मकर राशि वाले जातक इस दिन वाहन खरीदें।

* कुंभ राशि वाले जातक इस दिन मशीन या विद्युत (इलेक्ट्रिक) वस्तु खरीदें।

* मीन राशि वाले जातक इस दिन भूमि या स्वर्ण खरीदें।
688 days ago