Kedarnath Yatra 2011 detail , Timing and date of Kedarnath Yatra 2011

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Kedarnath Yatra 2011 detail , Timing and date of Kedarnath Yatra 2011
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Friday, 06 May 2011
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The opening of date of Kedarnath Temple is fixed and depends on the Shiva Ratri and decided by priests in Ukhimath. Normally Kedarnath temple opens on Mid May. The closing date of Kedarnath is fixed on Yama Dwitiya (second day after Diwali, November). Kedarnath Temple is open for devotees from 6 am to 2 pm and 5 pm to 8 pm. Shingar Darshan is from 5 pm onwards and Aarti is performed at 6:45 pm. Sharavani Annakoot Mela is celebrated on the day before Raksha Bandhan during August. Special Samadhi puja is help on the closing day of Kedarnath. The Kedarnath Temple committee office organises booking for special pooja which is performed before the general darshan in the morning
Thursday, 25 July 2013 by sujata mishra

Kedarnath jyotirlinga - केदारनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर तथा मार्ग परिचय

 

 

 

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग शिव जी के द्वादश ज्योतिलिंगों में से एक हैं! 

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग शिव जी के द्वादश ज्योतिलिंगों में से एक हैं! महिष रूप धारी शंकर के विभिन्न अंग पाँच स्थानों पर प्रतिष्ठित हुए - जो पंचकेदार जाने जाते हैं! 

प्रथम केदार में पृष्ट भाव, द्वितीय केदार मदमहेश्वर में नाभि, तृतीय केदार तुंगनाथ में बाहु, चतुर्थ केदार रूद्रनाथ में मुख, पंचम केदार कल्पेश्वर में जटा तथा पशुनाथ (नेपाल ) में माना जाता हैं! केदार नाथ में कोई निर्मित मूर्ति नहीं हैं ! 
 

एक त्रिकोण रूप का पर्वत खंड हैं जिसकी पूजा करते हैं और अंकमाल देते है ! 

 

मंदिर अत्यंत प्राचीन पर साधारण हैं! मंदिर में ऊषा, अविरुद्ध पञ्च - पांडव श्री कृष्ण तथा शिव पार्वती की मुर्तिया प्रतिष्ठित भी है ! 
 
 
मंदिर के बाहर परिक्रमा में अमृत कुंड, इशान कुंड, हंस कुंड, रेतस कुंड आदि तीर्थ हैं ! सतयुग में उपमन्यु ने और द्वापर युग में पाण्डवों ने आकर तपस्या की थी ! 
 
इस मंदिर का जीर्णोद्धार आदि गुरु श्री शंकरचार्य ने करवाया था ! मंदिर लगभग ११५०० फीट की उचाई पर पहाड़ में हैं इसलिए वहां की यात्रा मई के प्रथम सप्ताह में शुरू होकर दीपावली तक समाप्त हो जाती हैं ! अत्यधिक शीत होने के कारण यात्री यहाँ रात में नहीं ठहरते हैं ! 
 
अन्य केदार मदमहेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ तथा कल्पेश्वर के लिए यही मार्ग निधारित हैं ! ऋषिकेश से केदारनाथ लगभग २१६ किलो मीटर दूर हैं ! रुद्रप्रयाग से होते हुए सोनप्रयाग जो करीब १९४ किलोमीटर दूर हैं, बस से पंहुचा जा सकता हैं ! सोनप्रयाग के पास करीब ८ किलोमीटर पर गौरी कुंड हैं ! यहाँ भी बस द्वारा पहुचा जा सकता हैं ! 
केदारनाथ में ठहरने के लिए धर्म शालाये और पर्यटक लॉज आदि भी हैं, जहाँ भोजन की भी उचित व्यवस्था हैं ! 
 

 

 

 

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