Maharana Pratap Jayanti, Maharana Pratap Jayanti 2014, Maharana Pratap Jayanti date, पराक्रमी महाराणा प्रताप, महाराणा प्रताप जयंती, Maharana Pratap :The real hero

Maharana Pratap Jayanti, Maharana Pratap Jayanti 2014, Maharana Pratap Jayanti date, पराक्रमी महाराणा प्रताप, महाराणा प्रताप जयंती, Maharana Pratap :The real hero
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Sunday, 29 May 2011
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जन्म: 9 मई, 1540 Kumbhalgarh में, राजस्थान पिता का नाम: महाराणा उदय सिंह द्वितीय माता का नाम: रानी Jeevant कंवर निधन: 29 जनवरी, 1597 में Chavand महाराणा प्रताप (९ मई, १५४०- १९ जनवरी, १५९७) उदयपुर, मेवाड में शिशोदिया राजवंश के राजा थे। उनका नामइतिहास में वीरता और दृढ प्रण के लिये अमर है। हन्होंने कई वर्षों तक मुगल सम्राट अकबर के साथ संघर्ष किया।इनका जन्म राजस्थान के कुम्भलगढ में महाराणा उदयसिंह एवं माता राणी जीवत कँवर के घर हुआ था। १५७६ केहल्दीघाटी युद्ध में २०,००० राजपूतों को साथ लेकर राणा प्रताप ने मुगल सरदार राजा मानसिंह के ८०,००० की सेना कासामना किया। शत्रु सेना से घिर चुके महाराणा प्रताप को शक्ति सिंह ने बचाया। उनके प्रिय अश्व चेतक की भी मृत्युहुई। यह युद्ध तो केवल एक दिन चला परन्तु इसमें १७,००० लोग मारे गएँ। मेवाड़ को जीतने के लिये अकबर ने सभीप्रयास किये। महाराणा की हालत दिन-प्रतिदिन चिंतीत हुइ। २५,००० राजपूतों को १२ साल तक चले उतना अनुदानदेकर भामा शा भी अमर हुआ। लोक में रहेंगे परलोक हु ल्हेंगे तोहू, पत्ता भूली हेंगे कहा चेतक की चाकरी || में तो अधीन सब भांति सो तुम्हारे सदा एकलिंग, तापे कहा फेर जयमत हवे नागारो दे || करनो तू चाहे कछु और नुकसान कर , धर्मराज ! मेरे घर एतो मत धारो दे || दीन होई बोलत हूँ पीछो जीयदान देहूं , करुना निधान नाथ ! अबके तो टारो दे || बार बार कहत प्रताप मेरे चेतक को , एरे करतार ! एक बार तो उधारो||

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महाराणा प्रताप के पास उनका सबसे प्रिय घोड़ा “चेतक” था. हल्दी घाटी के युद्ध में बिना किसी सहायक के प्रताप अपने पराक्रमी चेतक पर सवार हो पहाड़ की ओर चल पड़ा. उसके पीछे दो मुग़ल सैनिक लगे हुए थे, परन्तु चेतक ने प्रताप को बचा लिया. रास्ते में एक पहाड़ी नाला बह रहा था. घायल चेतक फुर्ती से उसे लांघ गया परन्तु मुग़ल उसे पार न कर पाये. चेतक की बहादुरी की गाथाएं आज भी लोग सुनाते हैं.
Last replied by Gaurav on Friday, 30 May 2014
चढ़ कर चेतक पर घूम-घूम करता सेना रखवाली था ले महा मृत्यु को साथ-साथ मानो साक्षात् कपाली था रण बीच चौकड़ी भर-भरकर चेतक बन गया निराला था राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा को पाला था गिरता न कभी चेतक तन पर राणा प्रताप का कोड़ा था वह दौड़ रहा अरि मस्तक पर या आसमान पर घोडा था जो तनिक हवा से बाग़ हिली लेकर सवार उड़ जाता था राणा की पुतली फिरि नहीं तब तक चेतक मुड़ जाता था रणचंडी की जयकार कर मानो बन गया कृपाला था महाकाल का कर स्मरण हल्दीघाटी रण का मतवाला था स्वेत शरीर स्वेत आत्मा अपने स्वामी का रखवाला था महाप्रयाण की कर तैयारी उसका वो तेज़ निराला था राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा का पाला था !
Last replied by Gaurav on Friday, 30 May 2014
Jung Khaai Talwaar Sey Yudh Nhi Ladey Jaate Langdey Ghode Pey Daav Nhi Lagaaye Jaate Yun Lakho Veer Hotey Hein Par Sabh MAHARANA PRATAP SINGH Nhi Hotey Khubsoorat Har Ladki Hoti H Par Sab Rani “PADMINI” Nhi Hoti, Dharti Par Poot Tho Sabhi Hotey Hein Par Sbhi “RAJPUT” Nhi Hotey Hain.
Last replied by Gaurav on Friday, 30 May 2014
Hey Rana Thari Hukara sun sun Akber kaampyooo jaay…. Ambra may jaya bijli chamkay Tahri Talwar chamki jaaye Happy Maharana Pratap Jayanti
Last replied by Gaurav on Friday, 30 May 2014
MAI EHDA PUT JAN, JEHDA RANA PRATAP” rana pratap jese yodhha sahastrabdiyo me kewal ek bar hi janm lete he. raajputo ka maan samman or gorav ko badhane ke liye pura rajput samaj aapko shat shat naman krta he. Happy maharana pratap jayanti
Last replied by Gaurav on Tuesday, 11 June 2013