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Wednesday, 22 June 2011
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am not interested in loaves and fishes, or legislative honours. The peasantry do not understand them, they are little affected by them. I believe that Gandhiji's eleven points mean the substance of Swaraj. That which does not satisfy them is no Swaraj. Whilst I would respect the rights of landlords, rajas, maharajas and others to the extent, that they do not hurt the sweating millions, my interest lies in helping the downtrodden to rise from their state and be on a level with the tallest in the land. Thank God the gospel of Truth and Non- Violence has given these an inkling of their dignity and the power they possess. Much still remains to be done. But let us make up our minds that we exist for them, not they for us. Lot us shed our petty rivalries and jealousies, feuds and let everyone realise that the Congress represents and exists for the toiling millions and it will become an irresistible power... From the Presidential Address - Sardar Vallabbbhai Patel I.N.C. Session, 1931, Karachi.

Monday, 23 September 2013 by sujata mishra

Sardar vallabhbhai patel essay in Hindi

 

 

सरदार वल्लभ भाई पटेल (31 अक्तूबर, 1875 - 15 दिसंबर, 1950) भारत के स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी एवं स्वतन्त्र भारत के प्रथम गृहमंत्री थे।

पटेल का जन्म नडियाद, गुजरात में एक गुजर पाटिल कृषक परिवार में हुआ था। वे झवेरभाई पटेल एवं लदबा की चौथी संतान थे। सोमभाई, नरसीभाई और विट्टलभाई उनके अग्रज थे। उनकी शिक्षा मुख्यतः स्वाध्याय से ही हुई। लन्दन जाकर उन्होंने बैरिस्टर की पढाई की और वापस आकर अहमदाबाद में वकालत करने लगे।

महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लिया। सरदार वल्लभभाई झवेर पटेल (31 अक्तूबर 1875-15 दिसंबर 1950), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं में से एक एक भारतीय बैरिस्टर और राजनेता था और भारत गणराज्य के संस्थापक पिता की. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के लिए देश के संघर्ष में एक अद्वितीय भूमिका निभाई और एक संयुक्त, स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपने एकीकरण निर्देशित जो भारत के एक सामाजिक नेता होने के लिए जाना जाता है. भारत में और कहीं और, वह था अक्सर हिंदी में चीफ जिसका मतलब है कि सरदार, उर्दू और फारसी के रूप में संबोधित किया !

सरदार पटेल बर्फ से ढंके एक ज्वालामुखी थे। वे नवीन भारत के निर्माता थे। राष्ट्रीय एकता के बेजोड़ शिल्पी थे। वास्तव में वे भारतीय जनमानस अर्थात किसान की आत्मा थे।


भारत की स्वतंत्रता संग्राम मे उनका महत्वपूर्ण योगदान है। भारत की आजादी के बाद वे प्रथम गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री बने। उन्हे भारत का 'लौह पुरूष' भी कहा जाता है।

लौह पुरुष की शक्ति लौह पुरुष का साहस लौह पुरुष का संघर्ष सरदार पटेल जी की जयंती पर हममें ये सब गुण हम सभी में आये ! हैप्पी सरदार पटेल जयंती
Last replied by sujata mishra on Monday, 23 September 2013